Monday, May 17th, 2021 Login Here
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मंदसौर में जनता को घरों में बंद कर जिम्मेदार चेन तोड़ने का काम कर रहे हैं या उसे और मोटी करने का ? विचार करें
जिस महिला को कोरेन्टीन होना था वह कैसे बड़े अस्पताल पहुँच कर भर्ती हो गई और किसी को पता भी नही लगा?
अस्पताल के डॉक्टर और स्टॉफ को कोरेन्टीन होना था वह निरन्तर कर रहा काम,क्यो?
सरकारी अस्पताल की डॉक्टर ने कैसे कर दी निजी अस्पताल में जाकर सर्जरी


मंदसौर निप्र। कोरोना के खिलाफ जंग में मंदसौर के जिम्मेदारों की एक के बाद एक लापरवाहिया सामने आ रही है। नतीजा 36 पॉजिटिव सामने आ चुके हैं फिर भी लापरवाहिया रुकने का नाम नहीं ले रही है। यदि यह लापरवाहिया ऐसे ही चलती रहेगी तो मंदसौर को इंदौर बनने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। कोरोना से जंग जितने के लिए कोरोना की चैन तोड़ने के लिए जनता 22 मार्च से अब तक अपने घरों में बंद है। 42 दिन हो चुके हैं सभी अपने घर में बंद होकर इस चेन के टूटने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन लगता है जिम्मेदार जनता की इस तपस्या को भंग करने पर तुले हैं, वह कोरोना की चेन को तोड़ने का नहीं बल्कि शायद इसे और मोटा करने का काम कर रहे हैं। तभी तो एक के बाद एक गलतियां की जा रही है। जो साढे 7 माह की गर्भवती महिला कोरोना पॉजिटिव है वह कोरोना पॉजीटिव वृद्ध मृतक के परिवार की ही थी। ऐसे में उसे तो होम कोरेन्टीन होना था, उसका सैंपल भी जांच के लिए जाना था। लेकिन फिर भी वह बड़े अस्पताल तक पहुंच गई,गलत जानकारी देकर वहां 2 दिन तक भर्ती रह गई और बाद में कोरोना पॉजिटिव पाई गई। यही नहीं पॉजिटिव निकली इस महिला का उपचार करने वाले बड़े अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ को भी कोरेन्टीन में जाना था लेकिन वह आज भी बड़े अस्पताल में मरीजों का उपचार कर रहे हैं और तो और एक चिकित्सक ने तो निजी अस्पताल में जाकर सर्जरी तक कर दी ऐसे में कोरोना की यह चेन कहां तक पहुंचेगी? अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
जानकारी के अनुसार कसाईबाड़ा छिपा बाखल के रहने वाले उस्मान छिपा की दो दिन पहले इंदौर में मौत हो चुकी है। इनकी कोरोना रिपोर्ट अभी नही आई है लेकिन इनकी साढ़े 7 माह की गर्भवती बहु को कोरोना है जिसका उपचार इन्दोर में चल रहा है उस्मान के भाई अली भी इन्दोर रेफर कर दिए गए है उनकी भी कोरोना रिपोर्ट अभी तक नही मिली है। लेकिन तमाम यह जानकारियां प्रशासन के अधीन आने वाले स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाहियों को बता रही है। जब उस्मान का परिवार वृद्ध मृतक जो कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे उनके पड़ोस में ही रहता था,रिश्तेदार भी था तो फिर आखिर उनकी साढ़े सात माह की गर्भवती बहू को क्यों कोरेन्टीन नहीं किया गया? क्यों उसका सैंपल जांच के लिए नहीं लिया जा सका ? कटेन्मेंट एरिया में थी बावजूद इसके वहां से कैसे निकलकर जिला अस्पताल तक पहुंच गई ?और जिला अस्पताल जाने से पहले कैसे दो निजी अस्पतालों में चली गई ?2 दिन तक बड़े अस्पताल में भर्ती रही बावजूद इसके कंटेनमेंट एरिया में किसी को पता भी नहीं लगा कि जिसे कोरेन्टीन रहना था वह यहां से गायब है? कहां गई किसी को पता भी नही था। महिला कंटेनमेंट एरिया से निकलकर जिला अस्पताल के गायनिक ओपीडी में पहुंच गई वहां सांस लेने की तकलीफ बताकर महिला पहुँची लेकिन महिला चिकित्सक डा अनिता गहलोत को संदेह हुआ तो उन्होंने उसे रेस्पिरेटरी क्लीनिक भेजा था,जहां नर्सो ने उसका आवश्यक परीक्षण किया लेकिन भोजन अवकाश होने से चिकित्सक नही देख पाए लेकिन महिला इंतजार करने के बजाय आपातकालीन कक्ष 9 नम्बर में चली गई झा से उसे महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया जहां महिला दो दिनों तक भर्ती रही डॉ विक्रम अग्रवाल ने उसे देखा इस बीच गायनिक कॉल पर महिला चिकित्सक डॉ पूजा वर्मा ने भी उसका परीक्षण किया।   मेडिकल विशेषज्ञ डा विक्रम अग्रवाल को लगा कि महिला को कोरोना हो सकता है उन्होंने तत्काल अपने अधिकारियों को सूचित किया और महिला का कोरोना सेम्पल लेकर उसे तत्काल कोरेन्टीन सेंटर भेज दिया गया,जांच में महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई।
महिला आखिर कैसे कंटेंटमेन्ट एरिया से कैसे निकल गई? वहां उसका सैंपल क्यों नहीं लिया जा सका जबकि जानकार बताते हैं कि जो पुरानी किसी बीमारी से ग्रसित है या गर्भवती है और कंटेंटमेन्ट एरिया में रहते हैं तो उनका सैंपल लिया जाना चाहिए बावजूद इसके उसका सैंपल नहीं लिया गया यदि उसे किसी तरह की दिक्कत थी तो उसे कटेन्मेंट एरिया में मौजूद एमएमयू टीम को परीक्षण करना था। लेकिन महिला सीधे निकल कर पहले दो निजी अस्पताल में गई वहां पहचानी गई तो सरकारी अस्पताल पहुच गई, लेकिन वहां भी उसने सही जानकारी नहीं दी जिसके कारण उसे भर्ती कर लिया गया। मैं भी कोरोना के बादल मंडराने लगे है।

महिला की ट्रेवल हिस्ट्री अभी नही मिली है। पहले लग रहा था गुदरी के जिस वृध्द की मौत हुई है उनसे इसका परिवार जुड़ी है, महिला का परिवार अहमदाबाद से भी आया था लेकिन अभी पृरी तरह स्थिति स्पष्ठ नहीं है। रहा सवाल कंटेन्मेंट एरिया से बाहर आने का तो मेडिकल इमरजेंसी में वहां से आने की अनुमति है। वहां जो मेडिकल टीम रहती है वह सामान्य उपचार करती है। प्रेगनेंसी या अन्य का नही।
ऋषव गुप्ता
सीईओ जिला पंचायत

मेरी जानकारी में कुछ भी नहीं है,सारी जानकारी कलेक्टर सा ही देंगे।क्योकि में कही जाता नही हु,में जाने लगूँगा तो इन्फेक्शन का खतरा बड़ जाएगा और फिर पूरे प्रशासन के संकमण का खतरा बड़ जाएगा।
डॉ महेश मालवीय
सीएमएचओ

महिला गायनिक ओपीडी में आई थी जहां किट पहनकर डॉ अनिता गहलोत ने उसका चेकअप किया था। रेस्पिरिटी क्लीनिक में जिन नर्सो ने उसका चेकअप किया था उसमे से एक नर्स ने पूरे सुरक्षा इंतजार किए थे दूसरी के पास नहीं थे ऐसे मैं उसे और कोरेन्टीन कर दिया गया है इसके बाद मेडिकल विशेषण  डॉ विक्रम अग्रवाल ने इसे देखा था। लेकिन उन्होंने कीट नहीं पहनी थी परंतु दस्ताने और मास्क लगा रखा था ।यहां नर्सो ने किट पहन रखी थी इसलिए जिस नर्स ने किट पहन कर नही देखा उसे कोरेन्टीन किया है। अस्पताल में डॉक्टर की कमी है इसलिए  सुरक्षा कीट पहनकर उपचार करने वालों को कोरेन्टीन नही किया है।उन्हें सावधानी के साथ मरीजो का उपचार करने के लिये कहा है।
डॉ अधीर मिश्र
सिविल सर्जन
Chania