Saturday, May 8th, 2021 Login Here
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बेड खाली नहीं कहकर लोटा दिया था, दो घंटे बाद हो गई थी मौत, मंदसौर कलेक्टर ने लिखा था इंदौर प्रशासन ओर शासन को पत्र
इंदौर के नामी गिरामी अस्पताल की कई खामियोंके बाद सरकार ने की कार्यवाई

मंदसौर निप्र।  कोरोना संदिग्धों के इलाज के लिये चिन्हित येलो श्रेणी के ्र  इंदौर के जाने -माने गोकुलदास अस्पताल में मरीजों के उपचार में हुई लापरवाहियों के कारण इंदौर कलेक्टर ने अस्थाई तौर पर निरस्त कर दिया और पूरे मामलें की जांच के लिये कमेटी का गठन किया गया है। अस्पताल की लापरवाहियों के कारण मंदसौर के एक कोरोना पॉजिटिव की भी मौत हो चूकी है। अस्पताल में उसे भर्ती ही नहीं किया था जिसके कारण मृतक का तीन घंटे तक उपचार हीं नहीं हो पाया था इसकों लेकर मंदसौर कलेक्टर मनोज पुष्प ने कलेक्टर इंदौर के साथ ही शासन को भी पत्र लिखा था जिस पर इंदौर प्रशासन  ने आज कहा कि मंदसौर से आई शिकायत पर भी जांच होगी।
 जानकारी के मुताबिक 3 मई को मंदसौर के छीपा बाखल में रहने वाले बुजूर्ग की स्थिति गंभीर थी, मंदसौर में चिकित्सकों ने उनका समुचित उपचार कर इस स्थिति में ला दिया था कि वे इंदौर पहुंच जायें ताकी वहां उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में और बेहतर उपचार मिल सके ताकी उनकी जान बचाई जा सके क्योंकि वृध्द के फेफडे खराब थे। मंदसौर से उपचार के बाद वृध्द को दोपहर 1.40 बजे इंदौर के लिये एम्बुलेंस से भेजा गया था। शाम करीब 4.20 बजे वृध्द को लेकर एम्बुलेंस इंदौर के गोकुलदास हॉस्पिटल पहुंच गई थी लेकिन हॉस्पिटल ने पलंग नहीं है कहकर वृध्द को भर्ती करने से मना दिया था जिसके बाद एम्बुलेंस चालक वृध्द को लेकर बीमा हॉस्पिटल पहुंचा लेकिन वहां भी पलंग खाली नहीं मिला था बाद में चालक विशेष हॉस्पिटल पहुंचा लेकिन तब तक शाम के करीब 7 बज चूके थे। वृध्द को विशेष हॉस्पिटल में ले जाया ही जा रहा था लेकिन अस्पताल के अंदर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई थी। वृध्द के शव को इंदौर में ही सुपुर्दे खाक कर दिया गया था। उधर वृध्द के इंदौर पहुंचने तक मंदसौर प्रशासन भी लगातार नजर रख रहा था। एम्बुलेंस गोकुलदास अस्पताल पहुंच गई इसकी जानकारी कलेक्टर मनोज पुष्प ने ली थी जिसके बाद प्रशासन निश्चिन्त हो गया था कि वृध्द अस्पताल पहुंच गये है  और उनकी जांच बच जायेगी लेकिन तीन घंटे बाद पता लगा कि वृद्व की मौत हो गई। इसकों लेकर मंदसौर कलेक्टर मनोज पुष्प ने कलेक्टर इंदौर और शासन को पत्र लिखा था और लापरवाही बरतने वालों पर कार्यवाहीं की मांग की थी क्योंकि कोविड को लेकर शासन के स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी तरह की लापरवाहीं नहीं हो बावजूद इसके मंदसौर से गये बुजूर्ग को उपचार ही नहीं मिल पाया। शासन द्वारा कोविड के इलाज के लिये येलो श्रेणी के इंदौर के जाने-माने अस्पताल में ही बुजूर्ग को उपचार नहीं मिल पाया और बेड खाली नहीं होने का हवाला देकर उन्हे ंवहां से लोटा दिया गया। यदि अस्पताल प्रबंधन उन्हें पहुंचते ही तत्काल भर्ती कर उनका उपचार शुरू कर देता तो बुजूर्ग को तीन घंटे पहले उपचार मिल जाता और हो सकता है उनकी जान भी बच जाती लेकिन नामी अस्पताल की लापरवाहीं मंदसौर के बुजूर्ग को भारी पड़ गई जिससे उनकी जान चली गई।

6 लोगों का अभी इंदौर में चल रहा उपचार
मंदसौर से कोरोना संदिग्धों ओर पॉजिटिव में से अब तक 9 लोगों को इंदौर उपचार के लिये भेजा गया है जिसमें एक व्यक्ति की मौत इंदौर पहुंचने से पहले ही हो गई थी, दूसरे को उपचार ही नहीं मिल पाया था। तथा एक कोरोना पॉजिटव महिला जो मंदसौर के आश्रम में रहती है वह कोरोना से इंदौर में उपचार के दोरान कोरोना से जंग जीत चूकी है उसे अस्पताल से छुट्टि भी मिल गई है इसके अलावा गुरूवार को मंदसौर से चार और लोगों को उपचार के लिये इंदौर रैफर किया गया था लेकिन चार में एक तीन की रिर्पोट पॉजिटिव आई है एक की रिर्पोट नेगेटिव है लेकिन उसके साथ गये पुत्र की रिर्पोट कोरोना पॉजिटिव होने के कारण उसे भी इंदौर में ही भर्ती कर लिया गया है जिसके बाद अब इंदौर में 6 लोगों का उपचार चल रहा हैं। कल गये पांच लोगों से पहले इंदौर में मृत हुए बुजूर्ग के भाई को भी इंदौर रैफर किया गया था वहां उनका उपचार चल रहा है।
18 सेम्‍पल की रिपोर्ट प्राप्‍त होना शेष
कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम, बचाव एवं उपचार हेतु जिले में 15955 आने वाले यात्रियों की स्‍क्रीनिंग की गई है जिनमें से कुल 15955 यात्रियों को होम एवं कोरेन्‍टाईन सेन्‍टर में 14 दिनों के लिये कोरेन्‍टाईन किया गया है, जिसमें से होम कोरेन्‍टाईन 4935 एवं कोरेन्‍टाईन सेन्‍टर 276 व्‍यक्तियों को कोरेन्‍टाईन किया गया। जिसमें से 10744 यात्रियों का कोरेन्‍टाईन पूर्ण हो चुका है। 965 व्‍यक्तियों के सेम्‍पल लिये गये है, जिसमें से 947 की रिपोर्ट प्राप्‍त हो चुकी है, जिसमें 51 पोजिटीव, 6 कोरोना पोजिटीव स्‍वस्‍थ्‍य होने पर सेन्‍टर से डिस्‍चार्ज किया गया । 808 नेगिटिव पाये गये है । 18 सेम्‍पल की रिपोर्ट प्राप्‍त होना शेष है।
केंद्रों पर आज 38 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया
 कलेक्टर  मनोज पुष्प के निर्देशानुसार शहरी क्षेत्र के समस्त वार्डों में तथा प्रत्येक ग्राम के ग्राम आरोग्य केन्द्रों में फीवर क्लिनिक प्रारंभ किये जा रहे है। इन केंद्रों पर आज जिले में 38 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा उन्हें आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गई। फीवर क्लीनिक प्रतिदिन प्रातः 09 बजे से 12 बजे तक (रविवार छोड़कर)संचालित किये जावेगें, क्लीनिक प्रभारी एएनएम रहेगी जिसका सहयोग आशा कार्यकर्ता, ऑगनवाडी कार्यकर्ता तथा शहरी क्षेत्र मंदसौर में नगर पालिका भी करेगी। उक्त फीवर क्लीनिक में क्षैत्र के रहवासी सर्दी, खांसी, बुखार या अन्य कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या के बारे में बता सकेंगे। बिमारी से ग्रस्त व्यक्तियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाऐगा तथा उपचार प्रदाय किया जाकर चिकित्सकीय परामर्श दिया जावेगा। सामान्य बीमारी की सभी आवश्यक दवाईयॉं क्लीनिक पर ही उपलब्ध कराई जावेगी। गंभीर बीमारी के मरीजों को चिन्ह्ति कर उनकी लाईन लिस्टिंग तैयार की जावेगी तथा उनका टेलिमेडिसिन के माध्यम से उपचार कर उनकी आवश्यक दवाईयॉं उपलब्ध कराई जावेगी।  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ0 महेश मालवीय ने बताया कि फीवर क्लीनिक पर सामान्य बीमारियों की दवाईयॉं भी उपलब्ध रहेगी जिसमें गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का भी नियमित उपचार किया जावेगा।


- इस घटना को मंदसौर के संजिदा कलेक्टर मनोज पुष्प ने गंभीरता से लिया था और तत्काल इंदौर कलेक्टर और शासन को कार्यवाहीं के लिये लिखा था। इंदौर कलेक्टर ने इस पर संज्ञान लिया ही था कि गुरूवार को इसी गोकुलदास अस्पताल की बड़ी लापरवाहीं सामने आ गई एक ही दिन में 6 घंटे के अंतराल में यहां 6 लोगों की मौत हो गई जिस पर प्रशासन तत्काल हरकत में आया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रवीण जड़िया चिकित्सा दल के साथ गोकुलदास अस्पताल पहुंचे वहां का रिकार्ड जब्त किया  ओर पूरे मामलें की जांच शुरू की । हालांकि अस्पताल के आईसीयू में एक मरीज भर्ती था जिसकी स्थिति को देखते हुए अस्पताल को सील नहीं किया गया लेकिन अस्पताल का लायसंस अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया गया जिसके बाद अस्पताल अब किसी भी नये मरीज को भर्ती नहीं कर पायेगा।
मंदसौर से एक गंभीर मरीज को पूरी तरह से चिकित्सकों ने सेटल कर इंदौर भेजा था जिसे वहां के गोकुलदास अस्पताल में ले जाया गया था,पहले मुझे पता लगा था कि मरीज अस्पताल में पहुंच गया है लेकिन दो घंटे बाद पता लगा था कि गोकुलदास अस्पताल ने बेड खाली नहीं होने का हवाला देकर उसे भर्ती करने के बजाय वापस लोटा दिया था और बाद में उसकी मौत हो गई थी। इसकों लेकर मैने कलेक्टर इंदौर और शासन को पत्र लिखकर पूरी जानकारी से अवगत कराया था।
मनोज पुष्प कलेक्टर, मंदसौर
- गोकुलदास अस्पताल द्वारा बेड नहीं होने का हवाला देकर मंदसौर के एक मरीज को भी लोटा दिया था जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। इसकों लेकर मंदसौर कलेक्टर द्वारा एक पत्र भेजा गया है इस महत्वपूर्ण बिंदु पर भी जांच की जा रहीं है। फिलहाल अस्पताल का लायसंस अस्थाई तौर पर निरस्त कर दिया गया है।
डॉ प्रविण जड़िया
सीएमएचओं इंदौर

Chania