Saturday, May 8th, 2021 Login Here
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कोरोना के संकट में भी निजी डाक्टरों की नहीं जाग रहीं मानवता, लोग हो रहे परेशान

मंदसौर निप्र। वैश्विक महामारी कोरोना के संकट से मंदसौर जिला भी अछूता नहीं है लेकिन फिर भी धरती के भगवान कहलाने वाले तमाम निजी चिकित्सक अपने घरों में दूबके हुए है, कोई उम्र का बहाना बना रहा है तो कोई   व्यवस्थाओं को कोस रहा है। जबकी हमेंशा आलोचना सहने वाले सरकारी डाक्टर ना उम्र की परवाह कर रहे है और ना ही व्यवस्थाओं को कोस रहे है और ना ही सुरक्षा इंतजामों का इंतजार कर रहे है। जो उपलब्ध है, जैसा है उसी में वे बेहतरीन से बेहतरीन सेवाएं मरीजों को देने के लिये पूरे जूनून के साथ जूटे हुए है। उन्हें ना तो अपनी परवाह है और ना ही अपने परिवार की...। परवाह है तो सिर्फ संकटकाल में अपने और सिर्फ अपने कर्तव्य की जिसकी शपथ उन्होने चिकित्सा सेवा की डिग्री लेते समय ली थी। लेकिन सामान्य दिनों में आम लोगों की जेब पर डाका डालने वाले अधिकांश निजी चिकित्सक घरों में दूबक कर बैठे है। उन्हें कोई नहीं कह रहा कि आप कोरोना मरीजों का उपचार करें बल्कि उनसे तो केवल इतनी अपेक्षाएं की जा रही है कि वे कोरोना के लक्षण वालें मरीजों को छोड़कर दूसरी सामान्य और गंभीर बिमारियों का उपचार कर दे ताकी ऐसे मरीजों को कोरोना संक्रमण का खतरा मोल लेकर दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़े लेकिन फिर भी मानवता की सेवा की सौगंध लेने वाले डाक्टरों पर कोई असर नहीं हो रहा है।

कोरोना के संकट में इन निजी डाक्टरों के गायब होने के जनहितेशी मुद्दे को ......ने प्रमुखता के साथ उठाया, जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया और चौतरफा आलोचना के शिकार हुए ये डाक्टर आगे आएं कुछ ने अपने अस्पताल शुरू किये तो कुछ ने जिला अस्पताल की रेस्पीरेटरी क्लिनिंक पर सेवाएं देना शुरू किया तो लगा कि निजी डाक्टरों की मानवता भी जाग गई और वे भले ही देर आएं..दुरूस्त आएं की तर्ज पर अपनी सेवाएं जनता को देने लगे है लेकिन इतने दिनों के बाद अब एक बार फिर लग रहा है कि आलोचना से बचने के लिये इन डाक्टरों ने केवल सेवा का दिखावा ही किया। जनता जस की तस परेशान है उसे गली-मोहल्ले से लेकर आलीशान होटलों नूमा कई नर्सिग होम में अभी भी इलाज नहीं मिल रहा है। कोई डायलिसिस के लिये परेशान है तो कोई अपनी शूगर और बीपी के इलाज के लिये परेशान हो रहा है। जब इन निजी डाक्टरों के अस्पतालों के दरवाजे ही नहीं खुल रहे है तो फिर हैरान-परेशान लोगों को कोरोना संक्रमण का खतरा मोल लेकर भी दूसरे शहरों में जाकर इलाज करवाना पड़ रहा है और ये तमाम डाक्टर अपने घरों में ही आराम फरमा रहे है।जबकी प्रदेश सरकार ने एस्मा लगा रखा है जिसमें चिकित्सा कार्य को अति आवश्यक सेवा में शामिल किया गया है इसके बाद ना तो कोई अस्पताल बंद रख सकता है और ना ही कोई डाक्टर उपचार करने से मना कर सकता है लेकिन लगता है मंदसौर में ये निजी डाक्टर शासन के नियम-कायदों से भी उपर हो गये है इन्हें ना तो आम जनता के जीवन की परवाह है और ना ही नियम कायदों की चिंता है। ऐसे में अधिकांश डाक्टर कोरोना के संकट में अपने घरों से निकलने के लिये तैयार ही नहीं है और ना ही प्रशासन अभी तक इनसे एस्मा का उल्लंघन करने का कारण पूछ पाया हैं। इन डाक्टरों ने खुल्लम-खुल्ला नियमों की धज्ज्ाियां उडा दी है लेकिन फिर भी अब तक कोई कार्यवाहीं नहीं होना जिम्मेदारों की जिम्मेंदारी पर ही सवाल उठा रहीं है।

बताया जाता है कि आईएमए के पास ही सेवा के नाम से लॉखों रू का फंड है जिससे इन्होंने डाक्टरों के लिये   कभी सुविधाएं नहीं जुटाई,ना ही कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में दिल से योगदान दिया लेकिन अपने लिये सुविधाओं की भरपूर मांग की। 24 घंटे अपने घर-परिवार से दूर रहने वाले डाक्टरों के माफिक इन्होंने सरकार से 50 लाख रू के बीमे तक की मांग कर डाली जबकी कई निजी डाक्टर अपने घर से ही निकलने को तैयार है, दो घंटे अस्पताल की रेस्पिरेटरी क्लिनिक जाना था लेकिन इन्हें पीपीई कीट चाहिये थे फिर भले ही लगातार काम करने वाले सरकारी अस्पताल के डाक्टर केवल मास्क और ग्लब्स के सहारे ही उपचार करें। ऐसे में साफ है कि कई निजी डाक्टर और इनका संगठन केवलइन मांगों को कर अपने कर्तव्य को टालने की ही कोशिश कर रहा था क्योंकि इन्हें पता था कि सरकार से ये सब मिलेगा नहीं क्योंकि ये सारे इंतजाम तो सरकार 24 घंटे सेवा देने वाले डाक्टरों के लिये भी नहीं कर पाई है ऐसे में संगठन को कहने के लिये हो जायेगा कि हम काम करने को तैयार थे सरकार ने मांगे मानी ही नहीं।
आईएमए की कार्यप्रणाली पर डाक्टर ने ही उठाएं सवाल
कोरोना के संकट में कई निजी डाक्टर गायब है लेकिन डाक्टरों के संगठन आईएमए की स्थानिय इकाई की कार्यप्रणाली के कारण जो डाक्टर नागरिकों को अपनी सेवाएं देना चाहते है वे भी नहीं दे पाएं। आईएमए की इस कार्यप्रणाली का उसके सदस्य डाक्टर ही विरोध कर रहे है। मंदसौर के  हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ पाटीदार ने तो अपना दर्द दैनिक जनसारंगी के साथ साझा भी किया है।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ सी.एस. पाटीदार ने आईएमए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोरोना संकट मेंप्रशासन और जिले के सीएमएचओं ओर उनकी टीम निष्ठा के साथ काम कर रहीं है लेकिन डाक्टरों का संगठन आईएमए की जिला इकाई संकट की इस घडी में अपनी जवाबदेही के साथ काम नहीं कर रहीं है। आईएमए के इस रवैये से कई डाक्टर नाखुश है।
डॉ पाटीदार ने सवाल उठाते हुए कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिये फंड आईएमए के पास था कई डाक्टर्स चाहते थे इस फण्ड को प्रधानमंत्री राहत कोष में दिया जाये लेकिन नहीं दिया गया और ना ही जिले के जरूरतमंदों के लिये इस राशि को खर्च किया गया और ना ही जरूरतमंदों की किसी तरह से मदद की गई। कोरोना के संकट में लॉक डाउन के बाद भी मंदसौर के कुछ हॉस्पिटल नियमित रूप से सेवाएं दे रहे थे,नगर पालिका एक निश्चित अंतराल में उन सभी हॉस्पिटल सेनेटाईज करने को तैयार थी लेकिन फिर भी आईएमए ने इस सुझाव को नहीं माना, आईएमए केवल ब्लिचिंग पाउडर लेकर संतुष्ठ हो गया। लॉक डाउन के बाद  कुछ निजी चिकित्सक (मेडिकल विशेषज्ञ ),सर्दी, जुकाम ,बुखार वाले मरीजों का नियमित रूप से इलाज कर रहे थे,किसी को भी आईएमए ने सेफ्टी कीट मुहैया नहीं कराई।इसके अलावा आपातकॉलिन सर्जरी या दूसरी कई सर्जरी मेंभी पीपीई कीट की आवश्यकता होती है लेकिन फिर भी डाक्टरों के इस सुझाव को आईएमए ने नहीं माना। आईएमए ने सरकारी अस्पताल से 100पीपीई की दान में ली,कारण स्पष्ट नहीं हो पाया, किस वजह से ली,वापस कर दी । बाद में प्रस्ताव दे दिया जिनको जरूरत हो सरकारी अस्पताल से खरीद ले,दान किस लिए ली थी? जो डॉक्टर नियमित रूप से इस संकट की घड़ी में सेवाएं दे रहे हैं यदि कोरोना पॉजिटिव हो जाते हैं, ऐसी स्थिति में प्रशासन का रवैया उस डॉक्टर व उसके क्लीनिक,अस्पताल के प्रति क्या रहेगा आईएमए ने अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं किया। आईएमए   ने सरकारी अस्पताल में 2 घंटे की रेस्पीरेटरी क्लिनिक(सर्दी,जुकाम,बुख़ार, सांस मे तक लिफ वाले मरीजों के लिए)चला रखी है,इसमे वो निजी चिकित्सक मंदसौर की जनता को सेवाएं दे रहे हैं जिनको इस तरह के मरीजों का इलाज करने का कोई अनुभव ही नहीं है, यह काफी हैरानी की बात है,ये आईएमए के जिम्मेदारों की मनमानी है। ऐसा सिर्फ इसलिये किया गया ताकि मंदसौर की जनता व जिला प्रशासन    को लगे  कि (आईएमए)निजी चिकित्सक भी कोरोना के संकट में गंभीर हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं,जबकी ये केवल दिखावा है और फोटो शेषन क्लिनिक है। आईएमए का यह फैसला कोई सर्वसम्मति से नहीं लिया गया  बलिक इस फैसले से तो कई चिकित्सक नाखुश हैं। और तो और महंगे पीपीई कीट केवल दो घण्टे के इस फोटो शेषन में बर्बाद किये जा रहे जबकी ये दूसरे काम करने वाले चिकित्सकों के काम आ सकते थे।
डॉ पाटीदार ने कहा कि आईएमए के सारे सदस्य जिसमें शासकीय व निजी दोनो डाक्टर शामिल है मंदसौर शहर के सारे वार्ड और कॉलोनी में अलग-अलग टीम बनाकर सरकारी तंत्र के साथ घर-घर स्क्रिनिंग कर सकते थे लेकिन आईएमए के मुखिया किसी की सूनते नहीं सिर्फ अपनी मनमानी करते है उन पर धन का दुरूपयोग करने का भी आरोप है।

एक बार ओर कहेंगे
आईएमए ओर प्राईवेट नर्सिग होम एसोसिएशन को अपने क्लिनिक और नर्सिग होम नियमित रूप से प्रारम्भ करने के निर्देश दिये गये है लेकिन अभी जो क्लिनिक और नर्सिग होम प्रारम्भ नहीं हुए है उन्हें एक बार फिर से कह रहे है लेकिन इसके बाद भी ये जनता को सेवाएं नहीं देते है तो फिर नियमानुसार कार्यवाहीं करेगें।
डॉ महेश मालवीय
सीएमएचओं

- कल तक सारे क्लीनिक प्रारंभ हो जाएंगे। जो उम्र दराज चिकित्सक हैं उन्हें हमने अस्पताल प्रारंभ करने के लिए नहीं कहा है उन पर प्रशासन भी दबाव नहीं बनाएं। आईएमए ने किसी भी चिकित्सक को काम करने से मना नहीं किया है जो चिकित्सक काम करना चाहते हैं वह कर सकते हैं।
 डॉ प्रदीप चलावत
अध्यक्ष आई एम ए
Chania