Saturday, May 8th, 2021 Login Here
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जनप्रतिनिधि भी हुए मुखर, बोले वास्तविक दोषियों पर होनी चाहिए कार्रवाई
मंदसौर जनसारंगी।

नगरपालिका से गायब हुई फाईलों का मामला भोपाल तक सुर्खियां बटोर रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि वहीं फाईलें कार्यालय से गायब हुई है, जो विवादित थी। सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि काम करने के बाद पेमेंट नहीं मिलने के कारण फाईलें गायब कर दी गई। इधर सीएमओ ने एक बाबू को निलंबित कर इस मामले में अपने आपको पाक साफ जरुर बताया है। हालंाकि प्रश्र यह उठता है कि इस मामले में अभी तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। जबकि नपा प्रावधानों के मुताबिक फाईलें कार्यालय के बाहर नहीं जा सकती। इसके अलावा जनप्रतिनिधि और नेता भी इस मामले को लेकर मुखर हो रहे हैं। उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
पूरे मामले की बात करें तो 25 जनवरी को नपा में हुई पीआईसी की बैठक में नामांतरण के लगभग 700 प्रकरण रखे गए थे। नियम तो यह कहता है कि बैठक के दूसरे ही दिन बैठक की प्रोसिडिंग व सभी फाइलों पर नपाध्यक्ष के हस्ताक्षर हो जाना थे। पर लगभग सवा माह बाद 2 मार्च तक भी यह काम नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि अभी भी 100 से अधिक फाइले नपा से गायब है। प्रोसिडिंग भी तैयार नहीं हुई और पूर्व नपाध्यक्ष भी फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं जबकि उन्हे पद से हटे ही सवा माह होने को आया है। इसे छुपाने के चक्कर में मंगलवार को एक लिपिक राजेंद्र नीमा को निलंबित कर दिया गया। व नामांतरण शाखा देख रही मिल्की तिवारी को नोटिस दिया गया है। इधर नपा के सूत्रों की माने तो पूर्व अध्यक्ष व सीएमओ पीके सुमन के बीच कुछ मामलों में तनातनी के चलते ही वह अपने हस्ताक्षर भी नहीं कर रहे हैं और फाइले भी घर पर लेकर बैठे हैं।
कभी खटपट तो कभी उमड़ा प्रेम
सीएमओ अपने फायदे के लिए कभी राम कोटवानी के साथ थे तो कभी उनसे खफा रहे।  पूर्व नपाध्यक्ष राम कोटवानी और सीएमओ पीके सुमन के बीच कभी खटपट तो कभी दोस्ताना देखा गया। कुछ दिनों पहले नामांतरण को लेकर राम कोटवानी और पीके सुमन के बीच तगड़ी नोंकझोंक भी हुई थी। कोटवानी ने धरना देने तक की बात कहीं थी। यह इस बात का सबूत है कि फाईलों को लेकर कुछ न कुछ लोचा लंबे समय से चल रहा था। अब फाईलें गायब होने का मामला सामने आया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई बड़ा खेल यहां हुआ है। क्योंकि नगरपालिका से गायब अधिकांश विवादित फाईलें ही है। सूत्रों के मुताबिक जिन कामों को हरी झंडी दे दी गई या काम पूरा हो गया। उसके बदले पेमेंट बकाया है। इसी बकाया राशि को लेकर फाईलें दबा दी गई। अब फाईलें कहा है, यह जांच का विषय है।
बाबू पर फोड़ दिया ठिकरा
अब जब मामला सामने आया तो बाबू को जिम्मेदार बताकर उसे निलंबित कर दिया गया। लेकिन इतना बड़ा काम कोई छोटा सा कर्मचारी अकेला नहीं कर सकता है इसके पीछे जरूर कोई एक बड़ा सिंडीकेट काम कर रहा है। जिसका बेनकाब होना मंदसौर के लिए बहुत जरूरी है। इसके अलावा निलंबन की कार्रवाई भी अधिकारियों पर सवाल खड़े कर रही है।  निलंबन में भी सीएमओ ने कमजोर कड़ी को चुना। राजस्व शाखा का प्रभार विजय मांदलिया के पास है और नामांतरण शाखा मिल्की तिवारी देखती है। निलंबित लिपिक केवल पीआइसी की बैठक देखने वाला बाबू हैं। नामांतरण की फाइलें मिल्की तिवारी के यहां से गई हैं और इस पूरी शाखा की जिम्मेदारी विजय मांदलिया की है। पर सीएमओ ने केवल राजेंद्र नीमा को निलंबित किया और मिल्की तिवारी को नोटिस दे दिया। बाकी पर कोई कार्रवाई नहीं की।
फाईलें नपा से बाहर कैसे गई?
नगर पालिका अधिनियम कहता है कि नपा की फाइलें किसी भी जनप्रतिनिधि और यहां तक की सीएमओ के घर भी नहीं ले जाई जा सकती हैं। पर नगर पालिका की कुछ फाइल कभी वकीलों के नाम पर तो कभी अन्य कार्यों के नाम पर बाहर गई तो अभी तक नहीं आई है। 25 जनवरी को बैठक के बाद पूर्व नपाध्यक्ष के घर ले जाई गई कुछ फाइलें अभी तक वापस नहीं आई है। जबकि अभी नपा में कलेक्टर प्रशासक है और सीएमओ भी हैं फिर भी सवा माह में फाइल नहीं ला पाए।
इनका कहना
कलेक्टर पर भरोसा
मुझे मीडिया के माध्यम से फाईलें गायब होने की जानकारी मिली। नगरपालिका की कमान प्रशासक के रूप में कलेक्टर के हाथ में है। मुझे भरोसा है कि वह दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे। अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाना चाहिए।
-यशपालसिंह सिसौदिया, विधायक
जनप्रतिनिधि सिर्फ हस्ताक्षर करते हैं
जनप्रतिनिधि सिर्फ फाईलों पर हस्ताक्षर करते हैं। उनके पास दो मिनट के लिए फाईलें आती है। पूरी जिम्मेदारी स्थानीय अधिकारियों की होती है। अधिकारियों को संज्ञान लेना था। मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाना चाहिए।
-नानालाल अटोलिया, जिलाध्यक्ष, भाजपा
एफआईआर दर्ज होना चाहिए
नगरपालिका में हुआ यह मामला शर्मनाक है। भाजपा को भी इसकी सत्यता में जाना चाहिए। कलेक्टर को इसमें जांच करवाना चाहिए। संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना चाहिए।
-नवकृष्ण पाटिल, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
लिपीक फाईलें नहीं ला पा रहे थे
25 जनवरी को हुई पीआइसी की बैठक के बाद से ही उसकी प्रोसिडिंग भी नहीं मिल रही है और कुछ ठहराव प्रस्ताव भी नहीं मिले हैं। कुछ फाइले भी गायब है। इसको लेकर लगातार संबंधित लिपिक से बात कर रहे थे। पर वह फाइले नहीं ला पा रहे थे। इसके लिए राजेंद्र नीमा को निलंबित किया है। हमारे व अध्यक्ष के बीच एसी कुछ बात नहीं है।
-पीके सुमन, सीएमओ नपा

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