Friday, June 18th, 2021 Login Here
दो दिन में चार लोगों ने कर ली आत्महत्या/ एक ही दिन में तीन ने मौत को गले लगाया 200 वैक्सीन लगना थी लेकिन 100 ही लगी, ग्रामिणों ने किया हंगामा कलेक्टर ने किया मिनी गोवा यानी कंवला के हर संभव विकास का वादा आरक्षक की मानवता/ घायल को अस्पताल पहुंचाया और घटनास्थल से मिले दस हजार भी लोटाऐ राजाधिराज के पट खुलते ही आराध्य के दर्शन कर हर्षित हुए श्रृद्धालु कोरोना के सक्रिय संक्रमित 24 बचें लेकिन फिर मिला ब्लेक फंगस का संदिग्ध मरीज वैक्सीन लगवाने के बाद मंदसौर के राजाराम ने किया शरीर पर स्टील चिपकने का दावा धर्मातंरण की सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन ने खंगाली जेल बारिश से पहले हर बार नोटिस लेकिन सालों से नपा सूची से नाम ही नहीं हट रहे नेहरू बस स्टेण्ड हुआ विरान, उत्कृष्ट स्कूल मैदान में हुआ बसों का बसेरा छोटी पुलिया पर खड़े युवकों से 50 ग्राम स्मैक बरामद चैकिंग में हाथ लगी वाहन चोरों की गैंग, दो आरोपियों से तीन बाईक बरामद आज से राजाधिराज के दरबार में श्रृद्धालुओं को प्रवेश खुले शॉपिंग मॉल, जिम और रेस्टोरेंट, 62 दिन बाद लौटी रौनक कोरोना में सैकड़ों लोगों को खोने के बाद भी हवा की कीमत समझ नहीं आ रही
दबाव की राजनीति व विवेक तन्खा के ट्वीट से राज्यपाल लालजी टंडन नाखुश बताए जाते हैं।
भोपाल। महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव जनता के बजाए वार्ड पार्षदों से कराने संबंधी अध्यादेश राज्यपाल लालजी टंडन ने 'होल्ड" कर दिया है।

राज्यपाल ने जानना चाहा है कि सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों है? अध्यादेश पर सोमवार को निर्णय होना था, लेकिन राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा का ट्वीट आने के बाद मामले में 'टि्वस्ट" आ गया। इस मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस के बीच वार-पलटवार शुरू हो गया है। पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने महापौर का चुनाव सीधे जनता से होने को ज्यादा प्रजातांत्रिक बताया है।

राज्य सरकार की ओर से यह अध्यादेश राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया था, जिसे उन्होंने फिलहाल 'होल्ड" कर दिया है। उम्मीद थी कि इस अध्यादेश पर सोमवार को राज्यपाल निर्णय करेंगे, उनकी मुख्यमंत्री कमलनाथ, विभागीय मंत्री जयवर्धन सिंह और विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा भी हो गई थी, लेकिन मामले में तन्खा ने अपने ट्वीट के जरिए राजधर्म की नसीहत और अध्यादेश न रोकने की सलाह दे डाली। बताया जाता है राज्यपाल ने इसे दबाव की राजनीति माना, जबकि पूर्व में वह सरकार के साथ हुई चर्चा में आश्वस्त थे। अब इसे नए गतिरोध के रूप में देखा जा रहा है।

कमलनाथ से हुई फोन पर चर्चा

अध्यादेश को मंजूरी देने के मुद्दे पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री कमलनाथ की दो-तीन बार फोन पर भी चर्चा हो चुकी है। राज्यपाल ने मंत्री और विभागीय अधिकारियों से भी इस मामले में विचार-विमर्श के दौरान यह भी पूछा था कि देश के किन-किन राज्यों में यह व्यवस्था लागू है।

जनादेश के अपहरण की कोशिश न करें: शिवराज

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में राज्यपाल से मुलाकात कर अध्यादेश का विरोध किया। उन्होंने बताया कि मैंने राज्यपाल से मांग की है कि त्रिस्तरीय पंचायत के अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष हो। राज्यपाल राजधर्म का पालन कर रहे हैं, वह अनुभव की भट्टी से पके हुए हैं। कांग्रेस उन्हें सीख न दे।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस जनादेश के अपहरण की कोशिश न करे। सामान्य नागरिक के नाते भी मैं मुख्यमंत्री से कहूंगा कि वे खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देने वाला कदम न उठाएं, मेरी मांग है कि जिला व जनपद पंचायत के चुनाव भी सीधे कराएं।"

राज्यपाल सरकार को सहयोग करें: सिंघार

वनमंत्री उमंग सिंघार ने अपने ट्वीट में कहा कि महापौर चुनाव को लेकर चल रहा गतिरोध उचित नहीं है। राज्यपाल को पूर्वाग्रह से हटकर सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए, यही संवैधानिक व्यवस्था है।

Chania