Sunday, August 1st, 2021 Login Here
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मंदसौर जनसारंगी।
तीन -तीन सौ रूपऐ की पर्ची अस्पताल के बाहर आशीष मेडिकल पर कटाकर सीएमएचओं डॉ अधीर कुमार मिश्रा द्वारा अस्पताल में परीक्षण किये जाने के मामलें में विधायक यशपालसिंह सिसोदिया द्वारा मौके पर पूरे मामले का भण्डाफोड़ करते हुए अब कलेक्टर मनोज पुष्प को जांच दल गठित कर जांच रिर्पोट आयुक्त स्वास्थ्य को भेजने के लिये कहा जिसके बाद सीईओ जिला पंचायत ऋषव गुप्ता की अगुवाई में तीन सदस्यी जांच दल का गठन किया है जिसमें उपसंचालक पशु चिकित्सा डॉ मनीष इंगोले तथा तहसीलदार नारायण नांदेड़ को सम्मिलित किया गया है।
विधायक यशपालसिंह सिसोदिया ने कलेक्टर मनोज पुष्प को लिखे पत्र में कहा कि 6 अगस्त को सीएमएचओं डॉ अधीर कुमार मिश्रा के कक्ष के बाहर मरीजों की कतार लगी हुई थी, यह मरीज डॉ मिश्रा से स्वास्थ्य परीक्षण कराने हेतु इंतजार कर रहे थे। डॉ मिश्रा अपने कक्ष में बैठे थे तथा मरीजों को परिसर में रोकस की निर्मित की गई दूमानों से एक दुकान आशीष मेडिकल के व्यक्ति देवेश पाटीदार के हाथ में पर्चिया थी उन पर्चियों पर 6 अगस्त 2020 दिनांक अंकित थी। यह पर्चिया आशीष मेडिकल स्टोस से प्रति मरीज 300-300 रूपये की राशि प्राप्त कर मरीों को शासकीय चिकित्सालय में लाया गया था। पर्चियों पर मरीज का नाम, दिनांक ओर उम्र अंकित थी तथा लेटर हेड में डॉ ईला मिश्रा,डॉ नोमिता मिश्रा तथा डॉ ए.के. मिश्रा का नाम अंकित था।
इस सारे घटनाक्रमा में स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन की छबि धुमिल हुई है। डॉ मिश्रा चिकित्सालय में अपने प्रथम तल पर जहां सामान्य रूप से ओपीडी चलती है निशुल्क परीक्षण किया जाता है वहां न बैठकर फीस लेकर लाये गये मरीजों को प्रथम तल पर कार्यालय में देख रहे थे जो दण्डनिय अपराध है। डॉ मिश्रा उन्हीं मरीजों का ेदेख रहे थे जिन मरीजों की 300-300 रूपये की राशि आशीष मेडिकल पर जमा हुई थी।श्री सिसोदिया ने कहा कि डॉ मिश्रा लंबे समय से यह काम कर रहे थे एक शासकीय सेवक का शासकीय भवन में किया जाना यह कृत्यअपराधिक प्रवृत्ति का है ओर क्षमा योग्य नहीं है। मौके पर मिडिया के समक्ष मरीजों के बयान दर्ज हुए है जिसमें उन्होंने 300-300 रूपये आशीष मेडिकल पर जमा करने ओर डॉ मिश्रा से उपचार कराने के लिये बिठाने की बात कहीं है। इसी दौरान डॉ मिश्रा ने मिडिया के सामने सफाई दी है कि वे जनवरी 2020 के पश्चात आशीष मेडिकल पर कभी नहीं बैठे, यानी जनवरी माह तक वे सिविल सर्जन जैसे जिम्मेदार पद पर होने के बावजूद मरीजों का परीक्षण मेडिकल की दूकान पर कर रहे थे साथ ही उनका यह कथन कि पर्चीया पूरानी है इनके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है जबकि पर्चिया बिल्कुल फ्रेश थी।
श्री सिसोदिया ने कहा कि यह गौरखधंधा मैने स्वयं पकडा है और इस दौरान मिडिया,अन्य अधिकारीगण,मरीज, मरीजों के परीजन तथा जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय के स्टॉफ के कर्मचारी मौजूद थे सारा घटनाक्रम सार्वजनिक हुआ है। उन्होने यह भी कहा कि डॉ मिश्रा अभी 1-2 माह पहले ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के रूप ें शासन के आदेश से कामकाज देखना प्रारम्भ किया है इसके पूर्व लगातार पिछले 3-4 वर्षो से वे जिला अस्पताल में सिविल सर्जन के पद पद कार्यरत थे इस सारे घटनाक्रम में आशीष मेडिकल की भूमिका की संदिग्धता से इंकार नहीं किया जा सकता है। डॉ मिश्रा और आशीष मेडिकल के संचालक आशीष खमेसरा की भूमिका दलाली,मिलीभगत, शोषण की ओर इंगित करती है।इसलिये संपूर्ण घटनाक्रम के संबंध में जांच प्रतिवेदन शीघ्र अतिशीघ्र प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग को भेजा जाये।
विधायक श्री सिसोदिया के पत्र के तत्काल बाद कलेक्टर मनोज पुष्प ने जांच दल का गठन कर शीघ्र जांच रिर्पोट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है।

Chania