Monday, February 26th, 2024 Login Here
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लॉक डाउन में एक सप्ताह के बाद भी नहीं मिली निजी चिकित्सकों की समुचित सेवाएं,सरकारी डॉक्टर संक्रमण का खतरा झेलकर भी निभा रहे दायित्व
मन्दसौर। कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में लॉक डाउन को एक सप्ताह हो गया। मन्दसौर में इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के हाल नहीं बदले। सरकारी डॉक्टर औऱ स्टाफ जी- जान से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे है, तो प्रायवेट डॉक्टरों का लुकाछिपी का खेल जारी है। हालांकि मीडिया में खबरें प्रकाशित होने और शहर में आलोचना होने के बाद जूनियर डॉक्टर सेवा के लिये आगे आये और बाकी के डॉक्टरो ने अपने घर से फोन पर परामर्श शुरू किया। क्लीनिक भी कुछ देर खोलने की सहमति दी।
कोरोना को हराने के लिए लड़ा जा रहा युद्ध निर्णायक मोड़ पर है। डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ इस लड़ाई में  योद्धा का किरदार निभा रहे हैं। लेकिन मंदसौर के संदर्भ में एक कड़वा सच यह भी है कि देवदूत के नाम से पुकारे जा रहे चिकित्सकों का एक बड़ा वर्ग इस जुगाड़ में है कि कैसे इस दौर में काम से बचा जाए। यह वर्ग है प्रायवेट डॉक्टरों का, जिन्हें उनका दायित्व याद दिलाने  की मुहिम जनसारँगी ने छेड़ी है।
पहले बात की जाए उन सरकारी डॉक्टरों की जो आए दिन गालियां खाते हैं। उत्तेजित अटेंडरों की बदतमीजियां बर्दाश्त करते हैं, आये दिन आलोचना सहते है, चिकित्सको की घटती संख्या और बढ़ती मरीजों की तादाद के बावजूद बेहतर काम करने की कोशिश करने वाले सरकारी डॉक्टर आज भी कोरोना से युद्ध के मोर्चे पर डटे हैं। बिना किसी शिकायत, बिना किसी सुरक्षा की गारंटी के। कोरोना के चलते देश प्रदेश के कई अस्पतालों के वीडियो सामने आए हैं, जहां चिकित्सकों ने बचाव के पर्याप्त संसाधनों के  बगैर काम से हाथ खड़े कर दिए या विरोध दर्ज करवाया लेकिन मन्दसौर में सरकारी अस्पताल में ऐसा नहीं हुआ। इसके पीछे ऐसा भी नही है कि यहां कोरोना किट, हैंड ग्लब्स, मास्क आदि की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है।  बल्कि इसलिए कि यहां के सरकारी डॉक्टरों ने अपने  फर्ज को  सबसे  ऊपर रखा है, शहर वासियों की चिंता ने इन्हें अपनी जान को दांव पर लगाकर काम करने की जिद् पर चढ़ा दिया है। कोरोना से युद्ध मे सरकारी डॉक्टरो और पैरामेडिकल स्टॉफ ने कम संसाधनों में भी बेहतर करने की ज़िद और अपने पेशे के प्रति ईमानदारी की बेहतरीन मिसाल पेश की है। 

सरकारी होकर भी खुद जुटा लिए संसाधन

 एक हकीकत यह भी है कि सरकारी अस्पताल में कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टरों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसके बावजूद काम नहीं रूक रहा है। एन 95 मास्क नहीं है तो क्या हुआ, कपड़े के मास्क खुद बनवाकर काम चलाया जा रहा है। सेनेटाइजर और अन्य तरह के बचाव के उपाय डॉक्टर खुद कर रहे हैं। न कोई शिकवा, न शिकायत बस एक सोल्जर की तरह काम करते रहना, और शहर वासियों पर आंच नही आने देना यही इनकी जिद और जुनून है। सरकारी डॉक्टरों का यह समर्पण ही जनस्वास्थ्य का भरोसा बन गया है। 

सेनापति की तरह डटे सीएमएचओ

तमाम अभावों, कमियों के बावजूद बेहतर सेवा देने के सरकारी डॉक्टरों के जुनून के साथ सेनापति की तरह डटे हैं सीएमएचओ डॉ अधीर कुमार मिश्रा। सीएस का अतिरिक्त प्रभार,ऊपर से इस कठिन दौर में  कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में  जिला प्रशासन के एक्शन प्लान को अमली जामा पहनाने का काम आसान नहीं है। 60 पार की उम्र और लीवर की गंभीर बीमारी से लड़कर आए डॉ मिश्रा ने इस कठिन वक्त में भी प्रायवेट डॉक्टरों की तरह इस जिले की जनता को पीठ नहीं दिखाई। उनके इस हौसले को हर कोई सलाम कर रहा है। वे ना केवल खुद कोरोना से जंग के खिलाफ मोर्चे पर डटे है बल्कि अपनी सेना को भी बराबर प्रोत्साहित कर बेहतर काम के लिये उनकी पीठ थपथपा रहे हैं। जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर मनोज पुष्प की अगुवाई में यह स्वास्थ्य विभाग की ही सजगता है कि हमारे जिले को कोरोना अब तक छू भी नही पाया है।


 सेवा की मिसाल कायम कर देते
 निजी डॉक्टर संकट के इस दौर में सेवा की मिसाल कायम कर सकता था। ऐसा नहीं कि मंदसौर में सेवाभावी चिकित्सकों की कमी है। उम्र के तीसरे पड़ाव में भी मेडिकल विशेषज्ञ डॉ विजय शंकर मिश्र मंदसौर के भगवान माने जाते हैं वे सेवा में कभी पीछे नहीं रहते, 24 घंटे जनता की सेवा में तत्पर रहते हैं। डॉक्टर एस. एम. जैन भी ऐसी ही शख्सियत है ।जिनके दरवाजे 24 घंटे अपने मरीजों के लिए खुले रहते हैं। डॉ सुरेश पमनानी जो हमेशा मुस्कुराते हुए अपने मरीजों का न केवल उपचार करते हैं बल्कि उनकी हर संभव मदद भी करते हैं। डॉ सी एस पाटीदार सहित कुछ और डॉक्टर भी है जो लगातार अभी भी जनता की सेवा कर रहे हैं।
यह तो केवल चंद नाम है शहर में ऐसे डॉक्टरों की कमी नहीं है जिनके मनोभाव पूरी तरह से सेवा भावना के रहते हैं। ऐसे में आइएमए चाहता तो संकट के इस दौर में मंदसौर के लिए सेवा की एक मिसाल कायम कर सकता था। आइएमए  किसी भी एक नर्सिंग होम को इस समय शहर वासियों के इलाज को समर्पित कर सकता था।जहां तमाम प्राइवेट डॉक्टर पूरी सुविधाओं के साथ संकट की इस घड़ी में शहरवासियों का इलाज कर सकते थे और सीमित संसाधनों में काम कर रहे सरकारी डॉक्टरो का बोझ कम कर सकते थे,इसके अलावा भी बहुत कुछ था जो सेवा भावना से किया जा सकता था लेकिन  अब तक नही हो सका।
बेहतर करने की कोशिश कर रहे
हम अपने स्तर से शहर के लिये बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं। मंदसौर पहला जिला हैं जहां प्राइवेट डॉक्टर जिला अस्पताल में सेवा दे रहे हैं। अन्य मोहल्ला क्लीनिक को भी हमने थोड़ी देर खोलने के लिये कहा है। सभी वरिष्ठ चिकित्सक फोन पर परामर्श के लिये उपलब्ध हैं।
डॉ प्रदीप चेलावत
अध्यक्ष आई एम ए

Chania