Monday, February 26th, 2024 Login Here
गरीब के जीवन से कष्टों को मिटाना प्रदेश सरकार का लक्ष्य-डॉ यादव चिकित्सक पर हुई कार्रवाहीं का डाक्टरों व सिंधी समाज ने किया विरोध किरायेदारों से अनजान पुलिस, मकान मालिक भी लापरवाह नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद बंशीलाल जी गुर्जर का मंदसोर शहर में होगा भव्य स्वागत ट्रक में लहसुन के नीचे छुपाकर रख 1031 किलो डोडाचूरा जब्त, ड्राइवर गिरफ्तार मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव आज नीमच में 752 करोड से अधिक के कार्यो का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे 36 घंटे में पुलिस ने किया अन्तरॉज्जीय लूटेरों को गिरफ्तार मदिरा दुकानों के नवीनीकरण आवेदन 22 फरवरी तक करें पांच साल के इंतजार के बाद आज से मंदसौर में प्रारंभ होगा पासपोर्ट कार्यालय मध्यप्रदेश से राज्यसभा के पांचों प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित; 4 सीट बीजेपी, एक कांग्रेस के खाते में 133 किमी लंबे मार्ग में 14 किमी लंबा दूसरा रेलवे ट्रैक तैयार साँप भगाने के लिए टैंक में पेट्रोल डाला, तीली जलाते ही धमाका हुआ, दम्पत्ति झुलसे नदियॉ को छलनी करने का खेल चल रहा,माफियाओं पर नही लग पा रही नकेल सिंगिग स्टार बनने के चक्कर मे लोग हो रहे शिकार संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित होने वाले सांसदों को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने बधाई दी

मोदी कैबिनेट का महत्वपूर्ण फैसला
जनसारंगी न्यूज
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी गई। 34 साल बाद एजुकेशन पॉलिसी में बदलाव हुए हैं। सरकार ने कहा है कि 2035 तक हायर एजुकेशन में 50 प्रतिशत एनरोलमेंट का लक्ष्य तय किया है।  नई शिक्षा नीति के तहत दुनियाभर की बड़ी यूनिवर्सिटी देश में अपना कैंपस बना सकेंगी। कैबिनेट ने एचआरडी (ह्यूमन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट) मिनिस्ट­ी का नाम बदलकर मिनिस्ट­ी ऑफ एजुकेशन करने की मंजूरी भी दी है। यह फैसला नई शिक्षा नीति के ड­ाफ्ट की सिफारिशों के मुताबिक है।
राष्ट­ीय शिक्षा नीति 1986 में बनी थी - 34 साल पहले यानी 1986 में राष्ट­ीय शिक्षा नीति बनाई गई थी। करीब तीन दशक से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इसकी समीक्षा के लिए 1990 और 1993 में कमेटियां भी बनाई गईं थीं।
 नई शिक्षा नीति के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु - 
नई शिक्षा नीति के तहत सभी स्कूलों में कक्षा पांचवीं तक के बच्चों को दिए जाने वाले दिशा-निर्देश मातृ भाषा या क्षेत्रीय स्थानीय भाषा में दिए जाएंगे। हालांकि, यह कक्षा आठवीं या इससे ऊपर तक के छात्रों के लिए भी लागू हो सकता है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत सभी स्तरों पर संस्कृत और सेकंडरी स्कूल लेवल पर विदेशी भाषाएं भी प्रस्तावित की जाएंगी। हालांकि, नीति में यह स्पष्ट है कि कोई भी भाषा किसी बच्चे पर थोपी नहीं जाएगी।
पिछले साल जून में इसी मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया था। दक्षिण के राज्यों ने इसे लेकर विरोध दर्ज करवाया था। उनका कहना था कि वहां के स्कूलों में बच्चों को हिंदी पढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।
नई शिक्षा नीति में 10+2 क़े प्रारूप को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब इसे 10+2 से बांटकर 5़+3़+3+4 फ़ार्मेट में ढाला गया है। इसका मतलब है कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा एक और कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे। फिर अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा। इसके बाद में तीन साल मध्य चरण (कक्षा 6 से 8) और माध्यमिक अवस्था के चार वर्ष (कक्षा 9 से 12)। इसके अलावा स्कूलों में कला, वाणिज्य, विज्ञान स्ट­ीम का कोई कठोर पालन नहीं होगा, छात्र अब जो भी पाठयक्रम चाहें, वो ले सकते हैं।
  फिजिक्स के साथ फैशन की पढ़ाई करने की भी इजाजत होगी। कक्षा 6 से ही बच्चों को कोडिंग सिखाई जाएगी। स्कूली शिक्षा में 6-9 वर्ष के जो बच्चे आमतौर पर 1-3 क्लास में होते हैं उनके लिए नेशनल मिशन शुरू किया जाएगा ताकि बच्चे बुनियादी शिक्षा को समझ सकें। नई शिक्षा नीति के तहत जो बच्चे शोध के क्षेत्र में जाना चाहते हैं उनके लिए भी 4 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा। वहीं जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं उनके लिए 3 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा। रिसर्च में जाने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए एमफिल करने की बाध्यता नहीं होगी। वह एक साल के एमए के बाद चार का डिग्री प्रोग्राम में जा सकेंगे।
Chania