Sunday, March 3rd, 2024 Login Here
मंदसौर संसदीय क्षेत्र से सुधीर गुप्ता को मिला टिकीट सेवा कार्यो में उत्कृष्ट कार्य को लेकर रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा मंदसौर को मिला अवार्ड बांछड़ा डेरों पर पुलिस की दबिश, भारी मात्रा में अवैध शराब जप्त प्रतिवेदन पेश नहीं करने पर नपा सीएमओं के खिलाफ पांच हजार का जमानती वारंट जारी सूदखोरों से परेशान होकर की आत्महत्या, पिता के मृत्युभोज के लिए लिया था पैसा मंत्री सारंग ने की वन-टू-वन चर्चा, कहा 6 लाख वोट से भाजपा को जिताने का संकल्प ले लोकसभा चुनाव - भाजपा के 155 उम्मीदवारों की सूची आज घोषित होने की संभावना स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 200 से अधिक प्रतिनिधि को राष्ट्रीय अवॉर्ड से सम्मानित किया भैरव घाटी पर सड़क हादसा, एक की दर्दनाक मौत दो कारों की आमने-सामने भिडन्त, कॉन्स्टेबल की मौत मानपुरा में ग्रामीण के घर, बाड़े व स्विफ्ट कार से 63 किलो से अधिक अफीम जब्त सुपर पॉवर बनने की दिशा में तीन सेमीकंडक्टर, 1.26 लाख करोड़ के प्लांट को सरकार की मंजूरी 8 महिने बाद खाटु श्याम बाबा के मंदिर में प्रवेश कर भक्तों ने किए दर्शन 15 मिनिट में एक लाख का साउंड सिस्टम चुराने वाला बदमाश सीसीटीवी से पकडाया प्रधानमंत्री ने किया वर्चुअल भूमिपूजन, मंदसौर में 99.14 करोड़ की लागत से 18 महीने में तैयार होगा औद्योगिक पार्क

उज्जैन में किसान सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
उज्जैन / मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने न तो खेत देखा है और न ही खलिहान, वह किसानों के हितैषी बनने का दिखावा कर रहे हैं। राहुल गांधी पर चुटकी लेते हुए कहा कि वह बता दें कि भिंडी कैसे बोते हैं। कांग्रेस और वामपंथी दल किसानों को भड़का रहे हैं। किसान संगठन के नाम पर किसान विरोधी लोग आंदोलन में घुस गए हैं। उन्हें न किसानों की चिंता है न ही देश की। शिवराज मंगलवार को उज्जैन में सामाजिक न्याय परिसर में आयोजित संभागीय किसान सम्मेलन में किसानों को तीनों नए कृषि कानून समझा रहे थे। अपने 16 मिनट के भाषण में मुख्यमंत्री ने कृषि कानूनों के फायदे गिनाए।

मील का पत्थर साबित होंगे कृषि कानून

मुख्यमंत्री ने कहा, नए कानून से किसानों की आय बढ़ेगी। मील का पत्थर साबित होंगे। कानून के वही विरोधी हैं, जो खेती-किसानी नहीं जानते हैं। मैदान में नरेंद्र मोदी से मुकाबला नहीं कर पाते। घड़ियाली आंसू बहाने वाले कुछ लोग किसानों का हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के किसानों ने बता दिया है कि तीनों कानून उनके हित में है। कानून में यह प्रावधान है कि किसान अपनी उपज मंडी में बेचे या घर से ही। जहां उसको अच्छा दाम मिलेगा वह स्वतंत्र है अपनी उपज बेचने के लिए। अगर कोई लाइसेंस लेकर फसलों को खरीदता है और बढ़िया दाम देता है तो किसान उसे भी बेच सकता है। नए कृषि कानून में किसानों को बहुत सुविधाएं देने की कोशिश की गई है।

मंडियां बंद नहीं होंगी, एमएसपी जारी रहेगी

मुख्यमंत्री ने किसानों को समझाते हुए कहा कि मंडियां बंद नहीं होंगी। एमएसपी जारी रहेगी। पहले कानून में किसानों को यह अधिकार मिला है कि वह अपनी फसल को अपनी मर्जी से चाहे जहां बेच सकता है। इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। दूसरे कानून में कांट्रैक्ट फॉर्मिंग की सुविधा है। इसमें यह व्यवस्था है कि फसल की बोवाई के समय ही किसान से उसकी फसल का रेट तय हो जाता है। कटाई के बाद उसे वही दाम मिलेंगे जो बोवाई के समय तय हुआ था। चाहे कटाई के समय फसल के बाजार भाव भले ही कम क्यों न हो गए हों। किसान को बोवाई के समय ही यह पता रहेगा कि फसल कटने के बाद उसे क्या रेट मिलेगा। तीसरा कानून यह कहता है कि व्यापारी जितना माल खरीदेगा, उतनी ही प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे किसानों को बढ़िया दाम मिलेंगे। ये कानून किसानों के पक्ष में हैं। मध्यप्रदेश के किसान कृषि कानून के पक्ष में है।

कमलनाथ सरकार ने तो केंद्र को किसानों की सूची ही नहीं भेजी थी

मुख्यमंत्री शिवराज ने कमलनाथ सरकार पर आरोप लगाया कि कोरोना काल में भी किसान सम्मान निधि के लिए मध्य प्रदेश से किसानों की सूची केंद्र को नहीं भेजने दिया। जिससे किसानों को मिलने वाला छह हजार रुपए नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जैसे ही प्रदेश में बीजेपी की सरकार आई तुरंत किसानों की सूची भेजकर किसान सम्मान निधि की राशि किसानों के खाते में भिजवाई गई। यही नहीं केंद्र सरकार ने छह हजार रुपए दिए तो प्रदेश सरकार ने भी किसानों के खाते में चार हजार अलग से भेजे। कमलनाथ सरकार तो फसल बीमा के प्रीमियम के 22 करोड़ रुपए ही खा गई।

कांग्रेस नहीं चाहती कि किसान आत्मनिर्भर बनें

सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि कांग्रेस किसानों को आत्मनिर्भर नहीं होने देना चाहती है। किसानों को सशक्त और सक्षम बनाने के लिए ही तीन नए कृषि बने हैं। जिस तरह से उद्योगपति अपने उत्पाद के दाम पहले से ही तय करते हैं उसी प्रकार से अब किसान भी अपनी उपज का पहले से ही भाव तय करेंगे। इससे उन्हें खेती में होने वाला नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कमलनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि आज कमलनाथ का बयान आया है कि वह आराम करने के लिए तैयार हैं क्योंकि वह समझ चुके हैं कि मध्यप्रदेश का किसान उन्हें घर बैठाने के लिए उठ खड़ा हुआ है।

Chania