Monday, February 26th, 2024 Login Here
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जनवरी में आएगी नई मतदाता सूची, उसके बाद तय हो सकती चुनाव की तिथी, कोरोना संक्रमण को भी सरकार ने बनाया आधार
जनसारंगी न्यूज
भोपाल  । नगर पालिका अध्यक्ष  पद का आरक्षण होने के बाद से ही निकाय चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो चूकी है। दावेदारों ने मंदसौर से लेकर भोपाल तक दम-खम लगा दिया है लेकिन दूसरी तरफ निकाय चुनाव के दावेदारों के अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार अब नई मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही नगरीय निकाय चुनाव  कराने के मुड में है । इसके साथ ही एक बार फिर तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के चलते भी सरकार चुनाव को टालना चाहती है।
गौरतलब है कि नगरीय निकाय में पार्षद पद के लिए आरक्षण की प्रकिृया सितम्बर के अंत तक पूरी हो गई थी। इस महीने के दूसरे सप्ताह में नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों के आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी। आरक्षण की प्रकिया पूरी होते ही राजनीतिक दलों में बैठकों का दौर तेज हो गया था। टिकट को लेकर दावेदारों ने अपने राजनीतिक आकाओं की गणेश परिक्रमा भी शुरू कर दी थी। माना जा रहा था कि नगरीय निकाय चुनाव की अधिसूचना 27 दिसम्बर को जारी हो जाएगी पर अब नई मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद   चुनाव कराए जाने का निर्णय लिया गया है। नई मतदाता सूची पर काम चल रहा है और इसके अगले महीने यानी जनवरी तक प्रकाशित हो जाने की संभावना है, हालांकि अभी यह तय नहीं है कि इन चुनावों में नए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोंग कर सकेंगे या नहीं। बताया जाता है कि नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सीएम की संगठन नेताओं के साथ चर्चा हुई थी। उसके बाद ही यह निर्णय लिया गया है । अब चुनाव की तारीखों की घोषणा फरवरी के अंतिम हफ्ते या मार्च में की जाने की संभावना है।
संगठन सुत्रों की माने तो प्रदेश संगठन के नेता भी चाहते है कि चुनाव जल्दी न हों। इसके पीछे देश में चल रहा किसान आंदोलन भी बड़ी वजह बताया जा रहा है। संगठन का मानना है कि नए किसान कानूनों को लेकर संगठन जो जनजागरण अभियान चला रहा है चुनाव की तिथी घोषित हो जाने से उस पर असर पड़ेगा। संगठन का मानना है कि  आने वाले दो महीनों में जब सब कुछ सामान्य हो जाए उसके बाद ही नगरीय निकाय के चुनाव कराए जाए। नगरीय निकाय चुनाव टलने से पंचायतों के चुनाव भी आगे बढ़ गऐ है।अब पंचायतों के चुनाव अप्रेल- मई में कराए जाऐगें। इसके पहले पंचायत चुनाव फरवरी माह में कराए जाने की तैयारी चल रहीं है। भोपाल के गलियारों में चल रहीं इस चर्चा के मुताबिक यदि निकाय चुनाव आगे बढते है तो फिर चुनाव में दावेदारी करने वाले सभी दावेदारों के अरमानों पर हाल फिलहाल पानी फिरता दिख रहा है। मंदसौर में तो अध्यक्ष पद का आरक्षण होते ही चुनाव की चौसर बिछने लगी थी। भाजपा और कांग्रेस से जूड़े तमाम दावेदार रोज नेताओं के यहां चक्कर लगा रहे हैं। कई तो उज्जैन से लेकर भोपाल तक दौड़ लगा चूके है। अब तक भाजपा और कांग्रेस दोनो ही दलों को मिलाकर दो दर्जन से ज्यादा उम्मीदवार अध्यक्ष पद के लिए मैदान में आ चूके है वहीं 40 पार्षद पदो के लिए तीन सौ से ज्यादा दावेदार दावेदारी कर रहे है। हालांकि दोनो ही राजनीतिक दलों ने अभी चुनाव के टिकटों को लेकर मंथन शुरू नहीं किया है ऐसे में माना जा रहा है कि निकाय चुनाव आगे बढने की पूरी संभावना है।यदि चुनाव आगे बढ़ते है तो पूरी संभावना है कि राजनीति की चौसर में कई फेरबदल हो जाऐगें। दो-तीन महिनों के अंतराल में हो सकता है जिन दावेदारों ने अभी दम भरा है उनकी जगह कोई और दम-खम से मैदान में आ जाऐ।  
सिंधिया समर्थकों को जमीन की तलाश
राजनीति में अधिकांश कार्यकर्ताओं के आका होते है। भाजपा और कांग्रेस दोनो ही दलों में यहीं परम्परा रहीं है जिनके सहारे कार्यकर्ता राजनीति की पाठ पढ़कर आगे कदम बढाते हैं। ऐसा ही कुछ था कांग्रेस के कद्दावर नेता रहें ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ क्योंकि वे कांगे्रस में एक दिग्गज कांग्रेस नेता की भूमिका में थे अब वे भाजपा में आ चूके है हालांकि भाजपा में अभी हाल फिलहाल तो उनका कद कम कतई नहीं दिख रहा है लेकिन उनके पीछे खड़ी कार्यकर्ताओं की लंबी फोज संकट में दिखाई दे रहीं है। क्योंकि हजारों कार्यकर्ता सिंधिया के साथ कांग्रेस को अलविदा कहकर भाजपा में शामिल हो गऐ है और कई अभी भी कांग्रेस में ही डटे हुए है लेकिन संकट के बादल दोनो पर मंडरा रहे है। जो कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए है उन्हें और जो अभी भी कांग्रेस में ही है उन्हें भी जमीन की तलाश हैं। जो भाजपा में आऐ है उन्हें भाजपा में अभी कोई स्थानीय आका नहीं मिल रहा है और जो कांग्रेस में है उन पर अभी कांग्रेस का कोई दूसरा नेता भरोसा नहीं कर रहा है। ऐसे में दोनो ही दलों के सिंधिया समर्थक कार्यकर्ता परेशान है।
अब आने वाले दिनों में निकाय के चुनाव होने वाले है इन चुनावों में कई सिंधिया समर्थक भी चुनाव मैदान में भाग्य आजमाने को उतरने वाले है लेकिन उनके सामने अभी समस्या यह है कि उनका नाम आखिर रखेगा कौन । दरअसल भाजपा में परिपाटी है कि वार्ड के कार्यकर्ताओं से मंथन के आधार पर ही पैनल तैयार होता है और भाजपा में तो पहले ही भाजपा के कार्यकर्ताओं की बडी संख्या में ह ैअब सिंधिया समर्थक जो अभी नऐ-नऐ भाजपा में शामिल हुए है उनका नाम कौन रखेगा। यहीं स्थिति कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ भी हो रहीं है क्योंकि कांग्रेस के दूसरे नेता अभी उन पर भरोसा नहीं कर रहे है।
निकाय चुनाव चर्चा के लिए 25 को इंदौरा आऐगें
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी कुलदीप इंदौरा आगामी 25 दिसंबर को सुबह 10 बजे एक दिवसीय प्रवास के दौरान मंदसौर आगमन होगा। इस दौरान वे कांग्रेसजनो से आगामी नगरिय निकाय चुनाव के संदर्भ में चर्चा करेगे। जिला कांग्रेस अध्यक्ष नवकृष्ण पाटील ने बताया कि श्री इंदौरा 25 दिसंबर को सुबह 10 बजे जिला कांग्रेस कार्यालय पहुंचेगे। वे मंदसौर जिले से संबंधित पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष, जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्षो, विधानसभा के प्रत्याशियो, प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियो ब्लाॅक कांग्रेस के अध्यक्षगणो, मोर्चा संगठनो के अध्यक्षगणो, मंडलम अध्यक्षगणो, जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्षो सहित संगठन के पदाधिकारियो से संगठन की मजबूती एवं नगरिय निकाय चुनाव के संबंध में चर्चा करेगे। इसलिए समस्त उल्लेखित पदाधिकारियों से अनुरोध है कि आगामी 25 दिसंबर को सुबह 10 बजे जिला कांग्रेस कार्यालय गांधी चैराहा पर आयोजित बैठक में आवश्यक रूप से सहभागीता करे।
Chania