Sunday, March 3rd, 2024 Login Here
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दम तोड़ने लगी शिवना का जलसंग्रहण, कलेक्टर एवं नपा प्रशासक ने लगाई मुहर
मंदसौर जनसारंगी।
काला भाटा की तर्ज पर चंबल के पानी की योजना भी चकनाचूर हो गई। करीब 52 करोड़ रूपया अमृत योजना के तहत खर्च होने के बाद भी शहर को चंबल का पानी नहीं मिलेगा उधर अभी मानसूनी बारिश इतनी नहीं हुई कि शहर को पेयजल की आपूर्ति हो जाऐ क्योंकि अब शिवना नदी में इतना पानी नहीं है कि एक दिन छोड़कर भी शहर को जलप्रदाय किया जा सके ऐसे में अब दो दिन छोड़कर शहर को पानी मिलेगा। इसके आदेश बुधवार को नपा प्रशासक एवं कलेक्टर मनोज पुष्प ने कर दिए है।
पांच साल देरी से चंबल का पानी करीब डेढ़ महिने पहले मंदसौर पहुंचा तब ऐसा लग रहा था कि अब जलसंकट से राहत मिल जाएगी, लेकिन असल में ऐसा हुआ नहीं। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी योजना पूरी तरह से चकनाचूर होते नजर आ रही है। यहीं कारण है कि अल्पवर्षा का हवाला देकर नगरपालिका ने दो दिन में एक बार पानी शहर में वितरण करने की घोषणा कर दी है।  2016 में केंद्र की अमृत योजना के तहत स्वीकृत हुई चंबल पेयजल योजना का ठेका मुंबई की एक पाईप कंपनी ने लिया था। योजना में गड़बड़ी की शुरुआत तभी हो गई थी। जब ग्राम कोलवी में नदी के बीच में इंटकवेल बनाने के बजाय उसे किनारे पर बना दिया गया था। तब भी नगरपालिका के इंजीनियर चुप्पी साधे रहे। ठेकेदार पर कार्रवाई आज तक नहीं हुई। जैसेे तैसे काम पूरा कर 18 अप्रैल को लाईन टेस्टिंग शुरु की गई तो पाईप लाईन में लीकेज मिलना शुरु हो गया। ग्राम कचनारा, मोतीपुरा, चंदरपुरा सहित बारह से अधिक स्थानों पर पाईप लाईन से फव्वारें का निकलने लगे।
इसके साथ ही इंटकवेल पर 350-350 हार्स पावर के दो इंजिन चलाने के लिए 23 किमी विद्युत लाईन बिछाने का ठेका ताहिर खान को दिया गया। ठेकेदार द्वारा किए गये घटिया निर्माण के चलते 28 मई को बाजखेडी के पास 18 से 20 खंभे बांस की तरह मुड गए और पूरी बिजली व्यवस्था ठप्प हो गई।
जलाशयों ने दिया जवाब
शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए शिवना पर कालाभाटा व रामघाट बैराज हैं। गर्मी में दोनों में पानी खत्म हो जाता है।  ऐसे में नपा करीब डेढ़ माह से आधा शिवना के गड्ढों में जमा पानी को रामघाट पहुंचाकर रोज पानी सप्लाई कर रही है। इसमें एक दिन आधे व दूसरे दिन आधे शहर को पानी मिल रहा है। अब रामघाट, कालाभाटा सहित मिर्जापुरा तक जमा पानी भी खत्म होने लगा है। बुधवार दोपहर 12 बजे तक की स्थिति में रामघाट में एक दिन की सप्लाई के लिए 8 इंच भी पानी नहीं था। अभी मात्र कालाभाटा के पीछे गड्ढे में 3 से 4 दिन की सप्लाई जितना पानी है। यहीं कारण है कि अब दो दिन में एक बार पानी सप्लाय करने का निर्णय लिया गया है।
यह है योजना
-52 करोड़ की चंबल पेजयल आवर्धन योजना
-18 अप्रैल को पहली बार 350 हार्स पावर का एक पंप चलाकर टेस्टिंग हुई।
-27 मई को कुछ समय के लिए दोनों पंप चलाए, पाईप लाईन लीकेज हुई तो एक पंप बंद किया।
-28 मई को बाजखेडी में बिजली के दस खंभे धराशाही हो गए।
-पहली बार एक मई की रात को चंबल का पानी मंदसौर पहुंचा।
-पहली टेस्टिंग के दौरान कोलवी के समीप, कचनारा, चंदरपुरा सहित एक दर्जन स्थानों पर पाईप लाईन लीकेज मिली।

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