Sunday, February 25th, 2024 Login Here
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मंदसौर जनसारंगी।
 बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंककर्मी दो दिवसीय हड़ताल पर चले गये हैं। इसके चलते जिले की 122 बैंक शाखाओं में ताले लग गये है। सभी बैंकों के 600 से अधिक बैंककर्मी हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण पहले दिन जिलेभर के बैंकों में करीब 27 करोड़ 50 लाख रुपये का कामकाज प्रभावित हुआ। इतना ही कामकाज शुक्रवार को भी प्रभावित होने का अनुमान है। बैंकों में ताले लगने से ग्राहक परेशान होते रहे। वहीं एमटीएम बूथों पर राशि निकासी के लिये भीड़ रही, इसके कारण हड़ताल के पहले ही दिन एटीएम तेजी से खाली हो गये। ।बैंककर्मियों द्वारा हड़ताल निजीकरण के विरोध में हड़ताल की जा रही है। सरकार बैंक के निजीकरण की तैयारी में है। बैंककर्मी नाराज है और विरोध में उतर गए हैं। हड़ताल से दो दिन तक राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहेंगे और कारोबार प्रभावित होगा। आज 16 एवं  कल 17 दिसंबर को हड़ताल है। इसके बाद 18 दिसंबर को शनिवार को बैंक खुलेंगी। इसके बाद 19 दिसंबर को रविवार होने से फिर छुट्टी रहेगी। हालांकि ग्राहकों को चिंता की जरूरत नहीं है। क्योंकि हड़ताल के दौरान एटीएम लेन-देन होता रहेगा।
निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल के पहले दिन गांधी चौराहा पर नारेबाजी की। निजीकरण के कई नुकसान गिनाये और अपनी मांगों को पूरी ताकत के साथ रखा। बैंककर्मियों ने केन्द्र सरकार द्वारा बैंकों के निजीकरण के प्रयासों का एवं प्रतिगामी बैंकिंग सुधारों का विरोध करते हुए इस प्रस्तावित बैंकिंग कानून (संशोधन) बिल वापस लिये जाने की मांग की। यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन यूएफबीयू के आव्हान पर हड़ताल चल रही है। जिले में 12 बैंक व उनकी 110 शाखाएं हैं। सभी बैंक शाखाओं के करीब 600 से अधिक हड़ताल में शामिल हैं। इसके चलते बैंक शाखाओं में लेनदेन व अन्य काम से आने वाले लोग परेशान होते रहे। राशि की जरूरत होने पर एटीएम पर प्रतिदिन की तुलना में अधिक लोग पहुंचे। इसके चलते एटीएम भी तेजी से खाली हुए। प्रदर्शन के दौरान वक्ता श्रीनिवास मोड़, सुरेन्द्र संघवी, महेन्द्र चन्द्रावत, गजेन्द्र तिवारी, शिवराजेन्द्र शास्ता, भरत नागर, राजेन्द्र रत्नावत, आशीष जोशी, अजीत जैन, यशवंत जैन आदि ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर संजय शुक्ला, योगेश गुप्ता, विजय कानूनगो, भोलेश पाठक, विरेन्द्र भावसार, जिनेन्द्र राठौर, मंगलेश राठौर, सोनम गुप्ता, पूजा सौलंकी, लता, प्रियंका पंवार, अजय देशपाण्डे आदि उपस्थित थे।
बैंकों का निजीकरण अर्थव्यवस्था व जनता के हित में नहीं
हड़ताल के दौरान गांधी चौराहा पर प्रदर्शन में बैंककर्मियों ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों का निजीकरण अर्थव्यवस्था तथा आम जनता के हित में नहीं है। इतिहास गवाह है कि 1947 से 1968 तक 736 निजी बैंक बंद हो गये थे। उसके बाद भी 40 से ज्यादा निजी बैंक जनता की गाड़ी कमाई डुबोकर चले गये। इनका देश के विकास में कोई योगदान नहीं है, इनमें जमाकर्ताओं ने अपनी जमा पूंजी खोई है। दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों ने हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, औद्योगिक क्रांति में अभूतपूर्व योगदान देते हुए जनता के जीवन स्तर को उन्नात करने में अविस्मरणीय योगदान दिया। कई निजी बैंकों को बचाने के लिये सरकारी बैंकों ने अपने संसाधन लगाकर उन्हें अपने अंदर मिलाकर जमा धन को सुरक्षित किया। बैंकों का निजीकरण न देशहित में है न अर्थव्यवस्था के हित में।
निजीकरण कई युवाओं को रोजगार से वंचित करने का प्रयास है
प्रदर्शन में बैंककर्मियों ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों को बचाने के लिये कर्मचारी, अधिकारी संकल्पित है व निजीकरण के किसी भी प्रयास का हम विरोध करेंगे। बीते वर्षों में गरीब, दलित, वंचित, शोषित वर्ग के लाखों युवाओं को रोजगार देकर उनके परिवार को आर्थिक/सामाजिक रूप से सक्षम बनाया व सम्मानजनक जीवन स्तर प्रदान किया। निजीकरण के प्रयास कर इनको रोजगार से वंचित करने का प्रयास है। जिसका चारों और विरोध किया जा रहा है।

Chania