Sunday, March 3rd, 2024 Login Here
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    सुरक्षा परिषद ने चीन को चेतावनी दी- दूसरी कार्रवाई के विकल्प खुले हैं
    अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने मसूद को आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया था
    चीन ने प्रस्ताव में तकनीकी खामी बताकर रोका, कहा- वह बिना सबूताें के कार्रवाई के खिलाफ


चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएचसी) में देर रात जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने से फिर एक बार बचा लिया। बताया जा रहा है कि उसने इसमें तकनीकी खामी बताई है। 10 साल में चौथी बार है जब चीन ने इस प्रस्ताव को रोका है। फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका अजहर के खिलाफ यह प्रस्ताव 27 फरवरी को लाए थे। इस पर आपत्ति की समय सीमा (बुधवार रात 12:30 बजे) खत्म होने से ठीक एक घंटे पहले। चीन ने इस पर अड़ंगा लगा दिया। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि 10 से अधिक देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
चीन ने कहा कि वह बिना सबूतों के कार्रवाई के खिलाफ है। यही बात उसने तीन दिन पहले कही थी। इस पर अमेरिका ने चीन से गुजारिश की थी कि वह समझदारी से काम लें, क्योंकि भारत-पाक में शांति के लिए मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करना जरूरी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा- चीन के रवैए से निराशा हुई। आतंकियों के खिलाफ हमारी कोशिशें जारी रहेंगी।

भारत ने प्रस्ताव लाने और उसका समर्थन करने वाले देशों को धन्यवाद कहा है। इस बीच यूएनएचसी के सदस्यों ने चीन का चेतावनी दी है। चीन से कहा गया है कि अगर वह मसूद अज़हर को लेकर अपने रुख को नहीं बदलेगा तो दूसरी कार्रवाई के विकल्प खुले हैं।

प्रस्ताव टेक्निकल होल्ड पर

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यूएन में एक राजनयिक ने बताया कि चीन ने प्रस्ताव को ‘टेक्निकल होल्ड’ पर रखा है। इस प्रस्ताव पर समिति के सदस्यों को आपत्ति जताने के लिए 10 कार्यदिवस दिए गए थे। भारतीय समयानुसार यह समयसीमा बुधवार रात 12.30 बजे खत्म हो रही थी। समिति के नियमानुसार प्रस्ताव पर तय वक्त तक आपत्ति नहीं आती है तो उसे स्वीकार मान लिया जाता है।

वीटो और टेक्निकल होल्ड में फर्क है
चीन भी यूएन में वीटो पॉवर सदस्य है। वह भारत के प्रस्ताव पर अड़ंगा लगाने की ताकत रखता है। भारत ने 2009 में पहली बार यूएन में मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के लिए प्रस्ताव दिया था, लेकिन चीन ने उस समय वीटो का इस्तेमाल कर अड़ंगा लगाया था। हालांकि, टेक्निकल होल्ड का मतलब यह है कि संबंधित देश प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कुछ और वक्त चाहता है।
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