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न्यायालय ने सुनाई सजा, पांचों आरोपियों को किया दण्डित
मंदसौर जनसारंगी।

घर से कक्षा दसवी का परीक्षा परिणाम लेने के लिए निकली नाबालिक बालिका का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने वाले पांच आरोपितों को घटना के तीन साल में ही न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया उल्लेखनीय है कि मदंसौर जिले का यह पहला मामला है जिसमें नाबालिग के साथ सामुहिक दुष्कर्म के मामले में आरोपीगण को शेष प्राकृत जीवन काल तक के आजीवन कारावास से दण्डित किया गया है।
यह जानकारी देते हुए उप संचालक अभियोजन बापूसिंह ठाकुर ने बताया कि 15 मई 2018 को अपने घर से 10 वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम लेने स्कुल के लिए निकली थी लेकिन शाम तक घर वापस नहीं लोटी, परिजनों ने उसे तलाशा लेकिन नहीं मिली तो अगले दिन बालिका के भाई ने  सीतामऊ थाने पर उसकी गुमशूदगी दर्ज कराई। पुलिस ने उसकी पडताल शुरू की इसी दौरान 18 मई को पीडिता गंभीर स्थिति में मंदसौर शहर कोतवाली पर पहूंची, उसके कपडे फटे हूए, गंदे हो रहे थे। पीडिता ने थाना कोतवाली पर पदस्थ उपनिरीक्षक वंदना शाक्यवार को बताया की उसे दशरथ मोगिया व फूलचंद ने अपहरण कर मारूती वेन में सवार तीन अन्य युवकों को  सौंप दिया था। तीनों उसे मदंसौर में एक कुंए के पास ले गऐ और तीन दिन तक उसके साथ सामुहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने बालिका का मेडिकल परीक्षण कराया जिसमें उसके साथ मारपीट एवं दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि हूई।
इस पूरे  प्रकरण की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी के.एल.डांगी ने करते हुए आरोपित दशरथ पिता प्रभुलाल मोगिया व फूलसिंह पिता शांतिलाल दोनो निवासी हांदडी को गिरफ्तार कर लिया और कडाई से पूछताछ की तो उन्होंने तीन अन्य युवक कैलाश पिता जगदीश माली, राजू पिता दशरथ माली व राहूल पिता कन्हैयालाल राठौर, निवासी लदूना को हिरासत में ले लिया। तीनों आरोपियों ने भी दुष्कर्म की घटना को स्वीकार लिया।
उपसंचालक बापुसिंह ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए संचालक लोक अभियोजन संचालनालय भोपाल एवं पुलिस अधीक्षक मंदसौर सतत मानिटरिंग की इसके साथ ही विशेष लोक अभियोजक नितेश कृष्णन ने भी प्रभावी पैरवी की जिसके चलते प्रकरण में पीडिता व उसके भाई के बयान करवाऐ गऐ। प्रकरण में डीएनए रिपोर्ट अभियोजन के पक्ष में नहीं आयी  बावजूद इसके अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अन्य विश्वसनीय साक्ष्यों व अंतिम बहस में प्रस्तुत किए गए तर्को के आधार पर विशेष न्यायधीश  पाॅक्सो एक्ट जितेंद्र कुमार बाजोलिया ने पांचों आरोपियों को दोषी ठहराते हूए सभी को शेष प्राकृत जीवन काल तक के आजीवन कारावास के साथ अन्य अपराधों मेें भी दण्डित किया है। साथ ही पीडिता को आर्थिक प्रतिकर राशि प्रदान करने हेतू जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मदंसौर को पृथक से पत्र लेख किया गया है।
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हत्यारे पिता-पुत्र को भी आजीवन कारावास
मंदसौर जनसारंगी।

दुष्कर्म के पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही हत्यारे पिता-पुत्र को भी न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया है। जिसमें पंचम अपर सत्र न्यायाधीश इंद्रजीत रघुवंशी ने सीतामऊ क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ी जागीर में हुए हत्याकांड में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास और अर्थदण्ड की सजा से दण्डित किया है।
यह जानकारी देते हुए अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी नितेश कृष्णन ने बताया कि 10 मार्च 2009 को फरियादी सद्दू सिंह निवासी बोरखेड़ी ने सीतामऊ थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वो अपने भाई गोपालसिंह भगवानसिंह, मदनसिंह, फतेहसिंह के साथ रात आठ बजे बोरखेडी में घर के बाहर बैठा था तभी गांव का ही 80 वर्षीय उमरावसिंह पुत्र किशोरसिंह सौंधिया राजपूत व उसका बेटा 45 वर्षीय विक्रमसिंह सौंधिया राजपूत अन्य लोगों के साथ तलवार व लट्ठ लेकर आए। हमारे खेत के रास्ते से निकलने की बात को लेकर विवाद करने लगे। लाठियों व तलवारों से सभी ने हम पर हमला कर दिया। उमरावसिंह व विक्रमसिंह ने गोपालसिंह के सिर पर तलवार से वार किया। गांव के ही सौदानसिंह व गोवर्धनसिंह ने मौके पर आकर खून से लथपथ गोपालसिंह को ट्रैक्टर ट्राली में डालकर सीतामऊ चिकित्सालय लेकर आए। यहां से गोपालसिंह को उदयपुर रेफर किया गया। उपचार के दौरान 12 मार्च 09 को गोपालसिंह की मृत्यु हो गई। सीतामऊ पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान पूर्ण कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
पंचम अपर सत्र न्यायाधीश इंद्रजीत रघुवंशी ने दोनों पक्षों को श्रवण करने के बाद उमरावसिंह व विक्रमसिंह को भादसं की धारा 148 के तहत एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड, भादसं की धारा 302, 149 के तहत आजीवन कारावास व 5000 रुपये अर्थदंड, धारा 148 में एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड, धारा 307, 149 में 5-5 वर्ष का सश्रम कारावास व 2000 रुपये अर्थदंड, धारा 325 में 2-2 वर्ष का सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड, धारा 323 में 6-6 माह का सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन का संचालन लोक अभियोजक कांतिलाल राठौर ने किया।

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