Sunday, March 3rd, 2024 Login Here
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2009 के बाद अनुबंध भी नहीं आगे बडा, पूर्व पार्षद की शिकायत के बाद हुई कार्रवाहीं
मंदसौर जनसारंगी।
गांधी चौराहा पर नगरपालिका ने आज किराये से दी गई चार दुकानों को सील किया है। दुकानदारों ने अनुमति के विपरित निर्माण कार्य किया। इसके अलावा बारह साल से किराया नहीं जमा कराया। इसके बाद आज पुलिस बल के साथ नपा का अमला पहुंचा और दुकानें सील करने की कार्रवाई की गई। नपा अधिकारियों ने बताया कि अनुमति के विपरित निर्माण की शिकायत पूर्व पार्षद द्वारा की गई थी। वहीं 2009 से दुकानदारों ने किराया नहीं जमा किया। इसको लेकर नोटिस भी इन्हें जारी किए गए। लेकिन नोटिस का जवाब भी दुकानदारों ने नहीं दिया। इसके बाद यह कार्रवाई की गई है। हालांकि इतने सालों तक नपा की अनदेखी को लेकर सवाल भी उठ रहे है।
जानकारी के अनुसार  12 अक्टूबर 2021 को एक बार फिर पूर्व पार्षद संगीता शैलेंद्र गिरी गोस्वामी ने एक आवेदन कलेक्टर गौतमसिंह को जनसुनवाई में दिया था। इस पर भी सीएमओ ने कोई कार्रवाई नहीं की। तो 27 दिसंबर 2021 को फिर कलेक्टर कार्यालय में पूछा गया कि क्या कार्रवाई की गई है। इसके बाद जब नपा में कलेक्टर कार्यालय से लेटर आया तो अब जाकर नपा के अधिकारी कर्मचारी मौके पर पहुंचे और गैराज को तोड़कर बनाई गई दुकानों को सील किया। यहां से किरायेदार द्वारा 2006 में तीन साल के लिए नपा से अनुबंध किया था जिसमें नपा को महज 1725 रुपये महीना देना था। और यहं एक दुकान से 15-25 हजार रुपये महीने तक वसूला जा रहा है। हालांकि नपा के रिकार्ड में अभी भी गैरेज ही लिखा हुआ है।
बताया जाता है कि नपा ने लगभग 1975 में गांधी चौराहे पर स्थित नपा का गैरेज तीन-तीन वर्ष के लिए किराये पर दिया था। बाद में यहां प्रकाश सोप इंडस्ट्रीज भी लगी। शुरुआती अनुबंध में मासिक किराया तय करने के साथ ही यह शर्त भी थी कि किरायेदार यहां कोई अलग से निर्माण नहीं करेगा और न ही किसी दूसरे को किराये या पट्टे पर दे सकेगा। इसके बाद भी किरायेदारी बदलती रही और गैरेज का अनुबंध तीन-तीन वर्ष के बढ़ता रहा। 2006 में 1 दिसंबर 06 से 30 नवंबर 09 तक 1725 रुपये प्रतिमाह किराये पर अनुबंध कर दिया गया था। इसी बीच 2007 में गैरेज को तोड़कर नए निर्माण कराने के लिए आवेदन किया गया। नपाधिकारियों ने भी सारे नियम-कायदे ताक पर रखकर 10 दिसंबर 2007 को गैरेज की जगह हाल निर्माण की अनुमति जारी कर दी। उसके बाद चार दुकानें बनकर तैयार हो गई। फिर इधर नगर पालिका के इंजीनियरों को अपनी गलती का अहसास हुआ तो अनुमति में हाल काटकर गैरेज लिखा गया और रिकार्ड में भी गैरेज ही लिखा गया।
ईधर नपा के तत्कालीन अधिकारियों द्वारा की गई गड़बड़ी के बाद से किसी ने इस फाइल को हाथ नहीं लगाया। क्योंकि फाइल में गैरेज और मौके पर दुकानें होने से पूरा मामला ही गंभीर हो रहा है और 30 नवंबर 2009 को किरायेदारी समाप्ति के बाद से 12 साल बाद भी उसका नवीनीकरण नहीं किया गया है।

Chania