Sunday, March 3rd, 2024 Login Here
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मंदसौर। वेद की पह जवली रिचा ही अग्नि है। अग्नि ही यज्ञों के संवाहक होती हैं जो मनुष्य और देवताओं के बीच सेतु का काम करती है। वेद से भी पहले यज्ञ का महत्व है। यह उद्गार व्यक्त किए शंकराचार्य अवान्तर पीठ भानपुरा के युवाचार्य पूज्य स्वामी श्री वरुणेंद्र जी तीर्थ महाराज ने। आप श्री तलाई वाले बालाजी मंदिर ट¬स्ट के तत्वावधान में आगामी 20 से 25 जनवरी 2023 को होने जा रहे 6 दिवसीय स्वर्ण कलश आरोहण के निमित्ता आयोजित 108 श्री हनुमंत महायज्ञ की यज्ञशाला के निर्माण के भूमि पूजन के समारोह को संबोधित कर रहे थे।
आपने कहा कि आकाश वायु अग्नि जल और पृथ्वी यह सभी पंच महाभूत तत्व है। क्योंकि मनुष्य स्थूल रूप में होते हैं और देव सूक्ष्म रूप में इसलिए यज्ञों के ही माध्यम से देवताओं तक हमारी आहुतियां पहुंचती हैं और माध्यम बनती है अग्नि इसलिए अग्नि के महत्व को सनातन परंपरा में शास्त्रों ने सर्वोपरि बताया है। स्वामी जी ने कहा कि पुराणों में कहा गया है कि यज्ञ संस्कृति का प्रादुर्भाव सृष्टि के निर्माण के पहले से ही हुआ है। युवाचार्य ने ताले वाले बालाजी मंदिर शिखर पर आरोही स्वर्ण कलश समारोह के होने वाले आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्री राम श्री बालाजी के हृदय में विराजमान रहते हैं इसीलिए श्री बालाजी महाराज को अतुलित बल धाम भी कहा जाता है। भगवान राम अतुलित बल के प्रतीक हैं और धाम वह स्थान होता है जहां प्रभु का वास होता है तो  श्री बालाजी के हृदय में भगवान श्री राम विराजते हैं। इसलिए प्रभु श्री राम के प्रति हमारी भक्ति से श्री बालाजी महाराज अति प्रसन्न होते हैं। भक्ति और सेवा में श्री बालाजी महाराज की बराबरी कोई नहीं कर सकता।आपने यज्ञों की वैज्ञानिक तत्वों की भी बड़ी प्रभावी विवेचना की।
इस अवसर पर चित्रकूट से आचार्य श्री रामानुज ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी मंदिर का की पूर्णता शिखर से होती है और शिखर की पूर्णता स्वर्ण कलश से होती है यह अतिशय सौभाग्य की बात है कि श्री बालाजी महाराज की कृपा हम सब पर हुई और स्वर्ण कलश आरोहण का शुभ अवसर उपस्थित हुआ है। मंदिर के शिखर पर स्वर्ण का आरोहण जीवन की पूर्णता का भी प्रतीक माना जाता है। प्रभु के प्रति सर्ंपूण समर्पित भक्ति का प्रतीक होता है शिखर पर स्वर्ण कलश का आरोहण।
यज्ञाचार्य एवं विधि कारक आचार्य डॉ. देवेंद्र शर्मा शास्त्री ने कहा कि पृथ्वी के लिए जल बहुत आवश्यक है और अग्नि से ही जल उत्पन्न होता है।प्रभु प्रेरणा और उनकी दिव्य कृपा से श्री तलाई वाले बालाजी मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश का आरोहण हम सभी के सौभाग्य का जागरण है। अपने यज्ञों के महत्व की विवेचना करते हुए कहा कि यज्ञ के धुएं से ही बादल बनते हैं जो वर्षा के स्वरूप में  ईश्वर की कृपा के रूप में हम पर बरसते हैं। आपने बताया कि यह संपूर्ण यज्ञशाला 111 बाय 111 परिक्षेत्र में निर्मित होगी।  उत्ताम शिखर की ऊंचाई 101 फीट ऊंची रहेगी। 51 ऋषि कुमार यज्ञ विधि संपन्न करेंगे। मध्य में नौ कुंडों का निर्माण होगा और प्रत्येक खंड में 11 वेदियां बनाई जाएगी।
आरंभ में से तलाई वाले बालाजी मंदिर ट¬स्ट के अध्यक्ष पं. धीरेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि 1990 में 3 दशक पूर्व श्री तरह वाले बालाजी मंदिर के भव्य निर्माण की प्रेरणा ब्रह्मलीन शंकराचार्य  स्वामी श्री दिव्यानंद जी महाराज ने अपने मंदसौर के चातुर्मास के दौरान दी थी। उन्हीं का मार्गदर्शन था कि शिखर निर्माण पूर्ण होने पर स्वर्ण कलश का भी आरोहण कराया जाए। यह बड़ा ही दिव्या संयोग रहा कि 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्री राम लला बिराजेंगे। और 25 जनवरी को श्रीतलाई  वाले बालाजी मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश का आरोहण होगा ।भगवान बालाजी ने यही निश्चय कर रखा था कि जब राम लला आएंगे तभी उनके मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश चढ़ेगा। भगवान श्री बालाजी की कृपा हम सब पर सदा बरसती रहे यही सभी का ध्येय है।
 श्री बालाजी की तस्वीर पर माल्यार्पण और मंगलदीप प्रजनन कर पूज्य युवाचार्य ने समारोह का शुभारंभ किया विद्वान ब्राह्मण आचार्य ने वैदिक मित्रों का मंगलाचरण किया। युवाचार्य वरुणेंद्र जी तीर्थ और यज्ञाचार्य पं.देवेंद्र शास्त्री का स्वागत और सम्मान श्री तलाई वाले  बालाजी मंदिर ट¬स्ट की ओर से शाल और पुष्प माला पहना कर ट-स्ट अध्यक्ष पं.धीरेंद्र त्रिवेदी ,कार्यकारी अध्यक्ष जयप्रकाश सोमानी , सचिव, धन्नालाल भगत, उपाध्यक्ष दिलीप कुमार जोशी कोषाध्यक्ष गोपाल गोयल सह सचिव अशोक गुप्ता ट¬स्टी महेश कटलाना आदि ने किया। नवनिर्वाचित विधायक विपिन जैन नगर पालिका अध्यक्ष  रमादेवी गुर्जर हुडको डायरेक्टर बंशीलाल गुर्जर ने भी युवाचार्य जी का स्वागत किया। मंचीय आयोजन के बाद पंडित देवेंद्र शास्त्री द्वारा भूमि पूजन की विधि युवाचार्य जी सानिध्य में संपन्न कराई।
समारोह का संचालन वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी ने किया।आभार सचिव धन्नालाल भगत ने माना। समारोह में बड़ी संख्या में श्रध्दालुगण और मातृशक्ति उपस्थित थे।

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