Friday, June 18th, 2021 Login Here
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पचास से ज्यादा लोग हो गए बेघर, प्रशासन ने माना गलत तरीकें से दिए गये थे पट्टे
मंदसौर जनसारंगी।

 कल दौलतपुरा में भूरे खां के अवैध अतिक्रमण के साथ ही कई निर्दोष और गरीब लोगों के आशियानों पर भी जेसीबी चला दी गई। जबकि इन लोगों के पास पट्टे थे। इस पूरे घटनाक्रम में यह बात निकलकर सामने आ रही है कि सरपंचों सचिवों की मिलीभगत से चारागाह की भूमि पर इन लोगों को रुपए लेकर पट्टे वितरित किए गए थे। अब सरकारी जेसीबी इनके मकानों पर चल गई। इसके पहले न कोई नोटिस गरीबों को दिया गया और न ही मकान तोडने से पहले उनको कोई समय दिया गया। इस मामलें के बाद जिला कलेक्टर मनोज पुष्प ने स्वीकार किया कि सरकारी जमीन को लेकर बडा खेल खेला गया है क्योंकि मास्टर प्लान के तहत आने वाली इस भूमि पर पट्टे देने का अधिकार ही नहीं था, कुछ मामलों में पैसे लेकर पट्टे देने का भी मामला सामने आ रहा है पूरे मामलें की गहन जांच की जा रहीं है।
कल दौलतपुरा में आदतन अपराधी भू खां मेव का सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए अमला पहुंचा। कलेक्टर-एसपी के संज्ञान में डाला गया कि भूरे खां मेव का तीन हजार स्वायर फीट पर किया गया अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हरी झंडी दे दी, लेकिन मौके पर भूरे खां का ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया, बल्कि कई गरीबों को बेघर कर दिया गया। लगभग पचास लोगों के मकानों पर जेसीबी चलाकर नेस्तनाबुद कर दिया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कोई भू माफिया नहीं थे। यह वह लोग थे जो सरकारी जमीन पर गुमटी रखने से भी डरते हैं। वाह वाही लूटने के लिए दस करोड़ की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करना प्रचारित किया गया। हकीकत कुछ और ही थी जो दूसरे दिन गरीबों के अंासू बयां कर रहे थे। यह बात अलग है कि जिला मुख्यालय हो या तहसील मुख्यालय, जहां करोड़ों की सरकारी जमीन पर रसूखदारों के अतिक्रमण है। इनके साथ सिर्फ नोटिस नोटिस का खेल खेला जाता है, लेकिन यहां न नोटिस और न कोई समय और न ही अपना पक्ष रखने का समय दिया गया। सिर्फ मौके पर मौजूद जिम्मेदारों ने जेसीबी चलाने के निर्देश दे दिए। कुछ ही घंटों में लगभग पचास परिवारों का आशियाना मलबे में तब्लिक हो गया। सरकारी जेसीबी तो बिना सोचे समझे गरीबों के मकानों पर चला दी गई, लेकिन उससे पहले यह नहीं सोचा गया कि इन लोगों का इस ठंड में रात को क्या होगा। कयामत की यह रात गुजारने के लिए किसी ने रिश्तेदारों  के घरों की और रुख किया तो किसी ने खुले आसमान के नीचे ही रात गुजारी। हालांकि आज प्रशासन ने साफ कहा कि दिए गये पट्टे अवैध है, क्योंकि यह पूरा क्षेत्र मास्टर प्लान क्षेत्र में है यहां पट्टे दिए ही नहीं जा सकते है बावजूद इसके पट्टे दिए भी गए और उन्हें रजिस्ट्री के माध्यम से एक से दूसरे को बेचा गया। इस पूरे मामलें की जांच की जा रहीं है
रोजमर्रा का सामान तलाशते रहे बिखरे आशियाने से
परिवारों पर जो प्रशासनिक कहर टूटा है, उनमें परिवार का मुखिया रोज मजदूरी करके जैसे तैसे बच्चों का पेट भरता है। इसके अलावा कई महिलाएं भी मजदूरी करके मुखिया का साथ देती है, जिससे परिवार में बच्चे भूखे नहीं सोए। लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई ने इनके आशियाने को ही उजाड़ कर रख दिया। आज जो दृश्य यहां देखा गया, उससे किसी का भी दिल पसीज जाए। छोटे- छोटे बच्चे और महिलाएं सहित परिवारजन अपने-अपने आशियाने, जो मलबे में तब्दिल हो चुके हैं। उसमें रोजमर्रा में काम आने वाला जरुरत का सामान ढूंढते हुए नजर आए। यहां तक की खाने-पीने का सामान भी लोगों को मलबे से निकालकर साफ करते हुए देखा गया।
न नोटिस दिया ना समय सिर्फ चला दी जेसीबी
वैसे सरकारी नाले हो या सरकारी जमीन, करोडों के अतिक्रमण जिले में कई जगहों पर है। शिकायत भोपाल तक पहुंच चुकी है। लेकिन कार्रवाई सिर्फ नोटिस से शुरु होती है और नोटिस नोटिस के खेल पर ही समय के साथ खत्म हो जाती है। लेकिन दौलतपुरा में जिन गरीबों के ऊपर प्रशासन का कहर ढहा है। उन्हें न नोटिस दिया गया और न ही समय। नोटिस देना तो बहुत दूर की बात है। उन्हें घर का सामान भी निकालने का समय नहीं दिया गया। किसी के चूल्हे तो किसी का पलंग मलबे में दब गया।
सरपंच, सचिव और पटवारी पर खड़े हुए सवाल
सबसे बड़ी बात यह है कि जिन गरीबों के मकान तोड़े गए उनके पास पट्टे थे। 2011 से 2020 के बीच इन लोगों को नियमानुसार पट्टे वितरित किए गए थे। लोगों का कहना है कि उनके पास इसका कागजी सबूत भी है। लेकिन यह जानना प्रशासनिक अमले ने उचित नहीं समझा। अगर नोटिस दिया जाता तो कागज यह लोग पेश कर सकते थे। इसके अलावा मौके पर भी इनसे पट्टे के कागज मांगे जाते तो प्रशासनिक अधिकारियों को सबूत दे दिया जाता। लेकिन सिर्फ वाह वाही लूटने के लिए जेसीबी चलाकर आशियाने को मलबे में तब्दिल कर दिया गया। इस पूरे मामले में सरपंच, सचिव और पटवारी ने करतब दिखाए है। चारागाह की भूमि पर गरीब लोगों को पट्टे दे दिए गए। सूत्रों की माने तो चारागाह की भूमि पर पट्टे के बदले रुपए भी लिए गए। इसके बाद कलेक्टर-एसपी को गुमराह किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि भूरे खां का अतिक्रमण हटाया जा रहा है, लेकिन सैकड़ों को बेघर कर दिया गया।
पूरे मामलें की हो रहीं जांच
अवैध निर्माण को प्रशासन ने गिरा दिया है। इस दौरान सामने आया है कि सरकारी जमीन पर गलत पट्टा देने और उसे बेचने का काम किया गया है। पूरी सरकारी जमीन है, मास्टर प्लान के क्षेत्र में किसी को भी पटटा देने का अधिकार नहीं है। इसलिए सारे पट्टे अवैघ है। इसके अलावा पट्टे के बाद रजिस्ट्री और इसके बाद फिर रजिस्ट्री का मामला भी सामने आया है। इनमें से कुछ पर पैसे लेकर पट्टे देने का भी जिक्र है। पूरे मामलें की गहन जांच की जा रहीं है। जांच के आधार पर दोषियों पर सख्त कार्रवाहीं की जाऐगी।
मनोज पुष्प, कलेक्टर

कांग्रेस ने रखा कलेक्टर के सामने रखा गरीबों का पक्ष
ग्राम दोलतपुरा में गरीबों के मकानों को तोड़ने की कार्रवाहीं को लेकर कांग्रेस ने कलेक्टर मनोज पुष्प और एडीएम नरेन्द्रसिंह राजावत से मुलाकात कर कार्रवाहीं की मांग की है। इस दौरान पीढ़ित लोग भी साथथे। कांग्रेस ने जनता का पक्ष प्रशासन के सामने रखते हुए ग्राम पंचायत दौलतपुरा द्वारा बांटे गए पट्टे कार्रवाहीं को लेकर जांच और दोषियों पर कार्रवाहीं की मांग की। इस दौरान ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष मो हनिफ शेख ने बताया कि  ग्राम पंचायत दोलतपुरा में गरीबों के पटटे वालें मकान भी तोड दिया है। प्रशासन से मुलाकात कर मांग की गई है कि पूरे मामलें की जांच कराई जाऐ कि सरपंच -सचिव ने किस तरह से पट्टे जारी किए, लोगों के पास अनुमति भी थी फिर भी मकान तोड़ दिए गये है। गरीबों ने मेहनत कर अपने मकान बनाऐ है बावजूद उनके मकान तोड़ दिए, उनका पैसे का भी नुकसान हुआ और बेघर हो गए। पूरे मामलें से कलेक्टर और एडीएम को अवगत कराया है। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि पूरे मामलें की जांच कराऐगें और गरीबों की व्यवस्था भी करेगें।
Chania